पाली/अहमदाबाद: पाली (राजस्थान) के टेंट डीलर समिति और राजपुरोहित समाज ने स्वर्गीय गीता राजपुरोहित की संदिग्ध मृत्यु के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की जांच क्राइम ब्रांच या किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी (CBI) से कराने की मांग की है।
घटना का विवरण:
मृतका गीता राजपुरोहित की मृत्यु 15 अप्रैल 2026 को उनके ससुराल (वासना, अहमदाबाद) में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि एक सुनियोजित हत्या है। परिजनों ने बताया कि गीता भविष्य के प्रति सकारात्मक थी, उसने हाल ही में PTET परीक्षा का फॉर्म भरा था और ऑनलाइन बिजनेस में भी सक्रिय थी। ऐसे में आत्महत्या की बात गले नहीं उतरती।
पुलिस पर लापरवाही के आरोप:
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि आरोपी अर्जुन सिंह के पुलिस में होने के कारण स्थानीय पुलिस जांच में ढिलाई बरत रही है। FIR दर्ज करने में देरी, सह-अभियुक्तों के नाम हटाना, डायरी के पन्नों का गायब होना और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (मोबाइल/कॉल रिकॉर्ड्स) की अनदेखी करना पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बनाता है।
प्रमुख मांगें:
जांच को स्थानीय पुलिस से हटाकर क्राइम ब्रांच या स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए।
मुख्य आरोपी अर्जुन सिंह के साथ-साथ शारदा और संतोष की भूमिका की भी जांच हो।
गायब डायरी के पन्नों और फॉरेंसिक साक्ष्यों की गहनता से पड़ताल की जाए।
पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
टेंट एसोसिएशन पाली ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द ही दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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