पाली। ‘भंवर म्हाने पूजण दो गणगौर’ जैसे पारंपरिक मंगलगीतों की मधुर ध्वनि के बीच शनिवार को पाली शहर में गणगौर व्रत का उद्यापन बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। शहर के विभिन्न मोहल्लों में सजी-संवरी महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर शोभायात्रा निकाली और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

इस अवसर पर महिलाओं ने मिट्टी से बने ईसर-गणगौर (भगवान शिव और माता पार्वती) की प्रतिमाओं की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं अविवाहित युवतियों ने अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखकर श्रद्धा व्यक्त की।

गणगौर तीज की शुरुआत होली के दूसरे दिन से ही हो जाती है। इस दौरान महिलाएं नियमित व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की आराधना करती हैं। उद्यापन के दिन घरों में विशेष सजावट की गई—पवित्र स्थान पर 24×24 अंगुल के चौक को केसर और कुमकुम से सजाया गया तथा बालू से माता गौरी की प्रतिमा स्थापित की गई।

सुहागिन महिलाओं ने सोलह शृंगार की सामग्री जैसे कांच की चूड़ियां, महावर, सिंदूर, रोली, मेहंदी, टीका, बिंदी, कंघा, शीशा और काजल अर्पित कर पूजा संपन्न की। व्रत के समापन पर महिलाओं ने माता गौरी की कथा सुनी और व्रती महिलाओं को भोजन करवाकर विदा किया।

शहर के बापूनगर, महावीर नगर, इंद्रा कॉलोनी, सुंदर नगर, सोसायटी नगर, जनता कॉलोनी और नया गांव सहित कई क्षेत्रों में महिलाओं की कलश यात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कई स्थानों पर महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में लोकगीतों पर नृत्य भी प्रस्तुत किया, जिससे पूरे वातावरण में उत्सव का रंग छा गया।



