सोजत। मातमी पर्व मोहर्रम के अवसर पर गुरुवार रात सोजत शहर में अकीदत, अनुशासन और धार्मिक श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। शहर में निकले पांचों ताजियों के साथ “या इमाम… या हुसैन” और “लब्बैक या हुसैन” की गूंज से पूरा वातावरण गमगीन और श्रद्धामय हो उठा। मातमी ढोल-ताशों की धुन पर कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन की शहादत को नमः आंखो से याद किया गया।
निर्धारित समय पर पांचों ताजिए इमामबाड़े से बाहर लाकर अपने-अपने निर्धारित स्थानों पर स्थापित किए गए। यहां मुस्लिम समाज की महिलाओं द्वारा श्रद्धापूर्वक तैयार किए गए खोपड़े और खारक के साथ फूलो से बनाए गये सेहरे ताजियों पर चढ़ाए गए तथा मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं की गईं।
मोहर्रम के अवसर पर शहर के तकिया पाटी के ताजिए के सामने रात करीब 9 बजे अखाड़े के युवक पहुंचे। उन्होंने देर रात तक लाठी संचालन, दोनों हाथों में तलवार घुमाने, आग के चक्र से छलांग लगाने सहित कई हैरतअंगेज और रोमांचक करतब प्रस्तुत किए। युवाओं के कौशल और अनुशासित प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
इस दौरान मुस्लिम मोहल्लों में हजरत इमाम हुसैन की याद में हलीम, छबील (शरबत) कि शिर्नी (प्रसाद) का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में प्रसाद ग्रहण कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात संचालन के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा, जिससे मोहर्रम के सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए।


