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सोजत: बाजे-गाजे के साथ ऐतिहासिक दुर्ग में प्रवेश करेंगी सेजल माता, सोजत महोत्सव का होगा भव्य समापन।

सोजत सिटी। मेंहदी नगरी सोजत की आराध्य एवं अधिष्ठात्री देवी सेजल माता मंगलवार, 20 अक्टूबर को बाजे-गाजे के साथ ऐतिहासिक सोजत दुर्ग में प्रवेश करेंगी। इस ऐतिहासिक परंपरा के तहत माता रानी की एक दिन के लिए अपने पैतृक निवास में पुनः घर वापसी होगी। इस अलौकिक एवं धार्मिक आयोजन के साक्षी बनने के लिए सैकड़ों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। सेजल माता के दुर्ग प्रवेश के साथ ही पिछले नौ दिनों से चल रहे सोजत महोत्सव-2026 का भव्य समापन भी होगा।

जन्मोत्सव पर भजन संध्या, ध्वजा एवं केक सेरेमनी…

सेजल माता के ऐतिहासिक दुर्ग प्रवेश से पूर्व सोमवार शाम मंदिर परिसर में श्रद्धा एवं भक्ति का अनूठा माहौल देखने को मिला। सेजल माता मंदिर में भजन संध्या, ध्वजा कार्यक्रम तथा माता रानी के जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धापूर्वक उत्सव मनाया गया। इस दौरान केक सेरेमनी आयोजित कर बोलियां लगाई गईं, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। पूरा मंदिर परिसर माता रानी के जयकारों और भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा।

वहीं, सोमवार को सोजत शहर के विभिन्न घरों में सेजल कन्याओं का नवरात्रि पूजन किया गया। नवविवाहित दंपतियों सहित अनेक परिवारों ने सेजल कन्याओं को खीर, जलेबी, मिष्ठान एवं फल खिलाकर उनका पूजन किया। इस अवसर पर कन्याओं को चुनरी एवं स्नेह भेंट कर परिवारों ने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस परंपरा के माध्यम से सोजतवासियों ने अपनी आराध्य देवी के प्रति श्रद्धा और आस्था प्रकट की।

दोपहर बाद निकलेगी भव्य शोभायात्रा…

मंगलवार को सेजल माता मंदिर से दोपहर 2 बजे बाद भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में बाजे-गाजे, धार्मिक जयकारों और श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच माता रानी को ऐतिहासिक दुर्ग स्थित उनके पैतृक निवास तक ले जाया जाएगा। इस अवसर पर शहर में धार्मिक उल्लास का वातावरण रहेगा। सोजत की प्राचीन परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

सेजल माता के नाम पर पुनः बसा सोजत…

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन नगरी सोजत कई बार उजड़ने के बाद आसोज सुदी नवमी, विक्रम संवत् 1111 अर्थात वर्ष 1054 ईस्वी में अधिष्ठात्री देवी सेजल माता के नाम पर पुनः बसाई गई थी। मान्यता है कि सेजल माता राजा त्रवण सेन पंवार की देवस्वरूपा पुत्री थीं। माता रानी का जन्म अष्टमी को हुआ था। लोकमान्यता के अनुसार, अपने उद्देश्यों की पूर्ति के बाद माता रानी आठ-दस वर्ष की आयु में अष्टमी के दिन चौसठ योगिनियों के साथ चामुंडा माता भाखरी से अंतर्ध्यान हो गई थीं।

इन्हीं ऐतिहासिक मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के चलते सोजत में सेजल माता के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। प्रत्येक वर्ष माता रानी से जुड़े धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

नौ दिवसीय सोजत महोत्सव का होगा समापन…

सोजत के 973वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सोजत महोत्सव-2026 के अंतर्गत पिछले नौ दिनों से शहर में विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद कार्यक्रमों की धूम रही। सेजल माता मंदिर में महाआरती के साथ आरंभ हुए महोत्सव में भक्ति एवं शक्ति की भावना के साथ अनेक आयोजन हुए।

महोत्सव के दौरान महाआरती, वॉलीबॉल प्रतियोगिता, कबड्डी प्रतियोगिता, सोजतिया ज्ञान प्रश्नोत्तरी, बच्चों की रोचक प्रतियोगिताएं तथा सुप्रसिद्ध लोकगायिका सीमा मिश्रा के सांस्कृतिक कार्यक्रम ने शहरवासियों को उत्साह और मनोरंजन के यादगार अवसर प्रदान किए।

मंगलवार को सेजल माता की शोभायात्रा एवं ऐतिहासिक दुर्ग प्रवेश के साथ ही महोत्सव की गतिविधियों का समापन होगा। नौ दिनों तक चले इन आयोजनों ने सोजत की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान देने का कार्य किया।

आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में इनका रहा योगदान…

सोजत महोत्सव-2026 को सफल एवं यादगार बनाने में पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे, विधायक श्रीमती शोभा चौहान, महोत्सव समिति के संयोजक अनोप सिंह लखावत, अध्यक्ष जोगेश जोशी, सचिव चेतन व्यास, पुष्पतराज मुणोत, ताराचंद सैनी, गोरधनलाल गहलोत, देवीलाल सांखला, महेंद्र मेहता एवं जवरीलाल बौराणा,अकरम खान सहित अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आयोजन से जुड़े सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों से इस बार सोजत महोत्सव में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं, खेल प्रतिभाओं और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला। सेजल माता की शोभायात्रा के साथ संपन्न होने वाला यह महोत्सव सोजतवासियों के लिए ऐतिहासिक एवं यादगार अवसर बनेगा।

Akram Khan

Written by Akram Khan

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