सोजत रोड। कला के प्रति जुनून, वर्षों का अनुभव और हाथों का हुनर जब एक साथ मिलते हैं, तो ऐसी अनूठी कारीगरी सामने आती है, जो हर किसी का ध्यान आकर्षित करती है। सोजत रोड के सेवानिवृत्त अध्यापक पूरण जी सोनी पिछले 46 वर्षों से अपनी कलम और ब्रश के माध्यम से रावण के पुतलों के चेहरों को जीवंत रूप प्रदान कर रहे हैं।
पूरण जी सोनी की कलाकारी का दायरा सोजत सिटी, सोजत रोड और बगड़ी नगर सहित आसपास के क्षेत्रों तक फैला हुआ है। वे रावण के पुतलों के चेहरों पर अपनी कला का ऐसा हुनर दिखाते हैं कि उनकी बारीकियां और आकर्षक भाव पुतलों को विशिष्ट पहचान देते हैं। चेहरे की बनावट से लेकर आंखों और अन्य भाव-भंगिमाओं को उकेरने तक, उनकी कलम और ब्रश का कमाल साफ नजर आता है।
46 वर्षों का अनुभव, कला के प्रति अटूट समर्पण…
शिक्षण कार्य से सेवानिवृत्त होने के बाद भी पूरण जी सोनी का कला के प्रति लगाव बरकरार है। पिछले साढ़े चार दशकों से अधिक समय से वे निरंतर इस कार्य में जुटे हुए हैं। उनका यह हुनर न केवल उनकी कलात्मक प्रतिभा को दर्शाता है, बल्कि भारतीय संस्कृति और दशहरे की परंपरा से जुड़े रचनात्मक पक्ष को भी सामने लाता है।
दशहरे पर रावण के पुतलों का आकर्षण उनके चेहरों की बनावट और भाव-भंगिमाओं से भी बढ़ता है। ऐसे में पूरण जी सोनी जैसे अनुभवी कलाकारों की मेहनत इस परंपरा को खास बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हुनर और अनुभव की अनूठी मिसाल…
आज के दौर में जहां पारंपरिक कलाओं को सहेजना महत्वपूर्ण हो गया है, वहीं पूरण जी सोनी पिछले 46 वर्षों से अपनी कला के माध्यम से इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। कलम और ब्रश से रावण के चेहरों को आकर्षक स्वरूप देने की उनकी कला उनके समर्पण, धैर्य और अनुभव की मिसाल है।


