पाली, 21 अक्टूबर। रामलीला मैदान में दशहरा पर्व के अवसर पर श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित 51वीं संगीतमय रामलीला की अंतिम कड़ी के रूप में भरत मिलाप, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कलाकारों को पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।

कमेटी के प्रवक्ता पवन पाण्डेय ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ रामकथा वंदना के साथ हुआ। नृत्यांगनाओं ने “राम का गुणगान कर लो रे…” गीत पर मनमोहक प्रस्तुति देकर वातावरण को राममय बना दिया। वहीं, “कब आओगे राम अयोध्या…” गीत पर कलाकारों ने सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया। भरत मिलाप प्रसंग के दौरान “दर्शन पाओ रे…” गीत पर नृत्य एवं संगीत की आकर्षक प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में हास्य कलाकार अर्जुन बड़गोती ने अपनी हास्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया। इसके बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता सीता के अयोध्या लौटने के प्रसंग का मंचन किया गया। इस दौरान नृत्यांगनाओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में संगीतकार दिगम्बर व्यास, राजेन्द्र सिंह सोढ़ा एवं पार्श्वगायक चंचल गोस्वामी ने अपने मधुर संगीत और कर्णप्रिय स्वरों से जनमानस का मन मोह लिया।
श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित इस संपूर्ण रामलीला में स्थानीय कलाकारों ने अपनी लगन, निष्ठा और निःशुल्क सेवाभाव से भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। अंतिम दिन के मंचन में रोहित शर्मा, गोविंद गोयल, सुमित्रा राजपुरोहित, परमेश्वर सिंह दुदावत, नरेश परिहार, जयेश शर्मा, अंकित रांका, नेमीचंद टांक, मांगीलाल तंवर, अर्जुन बड़गोती, अंजली भाटी, जया जोशी, कंचन दासानी, साक्षी, रुपाली जोशी, पिंकी, झील, परी, सजना, रानी, खुशी, अनामिका राजपुरोहित, भाविका एवं खुशबू शर्मा सहित अनेक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन कर भारतीय संस्कृति को साकार किया।
कार्यक्रम में पधारे अतिथियों वन्देमातरम् एकेडमी के संस्थापक राजेन्द्र सिंह भाटी, कैलाश टवानी, नगर निगम पार्षद नवीन वागोरिया, का कमेटी अध्यक्ष परमेश्वर जोशी, उपाध्यक्ष एम.एम. बोड़ा, सचिव हीरालाल व्यास, सह सचिव देवीलाल पंवार, घनश्याम भाटी, घीसूलाल व्यास, दर्शन तलवार, बाबूलाल कुमावत, प्रकाश चौधरी ने दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
अंत में अतिथियों एवं कमेटी सदस्यों ने रामलीला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस प्रकार नौ दिवसीय संगीतमय रामलीला का समापन भक्ति, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं भरत मिलाप के भावपूर्ण प्रसंग के साथ हुआ।

