पाली। शहर का सबसे बड़ा और हृदय स्थल माना जाने वाला लखोटिया उद्यान इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर अपनी पहचान खोता जा रहा है। कभी बच्चों की किलकारियों और बुजुर्गों की चर्चाओं से गुलजार रहने वाला यह गार्डन आज पूरी तरह से क्षतिग्रस्त और अव्यवस्थित हो चुका है।
टूटे झूले और बिखरा कचरा: सुविधाओं का अकाल
उद्यान की स्थिति इतनी दयनीय है कि बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले और फिसल पट्टियां पूरी तरह टूट चुके हैं, जिससे बच्चों को चोट लगने का डर बना रहता है। इतना ही नहीं, लाखों की लागत से लगे व्यायाम उपकरण (Open Gym) भी अब कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। मॉर्निंग वॉक पर आने वाले शहरवासियों का कहना है कि यहाँ की सीमेंट की ब्लॉक उखड़ चुकी हैं और चारों तरफ गंदगी व कूड़े-करकट का अंबार लगा रहता है।

“मेहमानों को ले जाने में भी आती है शर्म”
स्थानीय निवासियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि लखोटिया उद्यान पाली की शान हुआ करता था, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि घर आए मेहमानों को भी यहाँ लाने में संकोच होता है। गर्मी के मौसम में जहाँ शाम को यहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती थी, वहीं आज अव्यवस्थाओं के कारण यह उद्यान सूना पड़ा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की आवाजाही और जन आक्रोश के बावजूद प्रशासन की ओर से इसके जीर्णोद्धार या साफ-सफाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। निर्माण कार्य तो दूर, उद्यान की सामान्य देखभाल भी ठप पड़ी है।




