पाली। इस्लामी नववर्ष 1448 हिजरी के आगमन पर पाली शहर में करीब 326 वर्षों से चली आ रही अनूठी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए मंगलवार शाम भैरूघाट चौराहे पर ऐतिहासिक चिराग रोशन किया गया। मुस्लिम समाज के लोगों ने हजरत इमाम हुसैन की याद में फातिहा ख्वानी कर देश, प्रदेश और पाली शहर में अमन-चैन, भाईचारे एवं खुशहाली की दुआ मांगी।
मुस्लिम समाज के प्रवक्ता शकील नागौरी ने बताया कि जोधपुरी पत्थर से निर्मित यह चिराग करीब 70 से 80 किलो वजनी है। इसमें नौ लौ जलाई जाती हैं और इस्लामी नववर्ष की पूर्व संध्या से लेकर लगातार नौ दिनों तक इसे प्रज्ज्वलित रखा जाता है। प्रतिदिन इसमें करीब डेढ़ लीटर तिल्ली का तेल डाला जाता है। मान्यता है कि इस चिराग को रोशन करने से शहर प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहता है तथा यहां शांति और समृद्धि बनी रहती है।
मुस्लिम समाज के सदर मोहम्मद हकीम ने बताया कि वर्षों पुरानी मान्यता के अनुसार इस चिराग में तेल अर्पित कर मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा जूनी पाली मस्जिद के निर्माण काल से जुड़ी हुई है। मस्जिद का निर्माण हिजरी सन 1121 में हुआ था और तभी से मोहर्रम की पहली तारीख से नौवीं तारीख तक यह चिराग रोशन किया जाता है।
इससे पूर्व जिला मुस्लिम समाज कार्यालय में इस्लामी नववर्ष की आमद पर फातिहा ख्वानी की गई तथा शीरनी वितरित की गई। समाज के सदर मोहम्मद हकीम और उपाध्यक्ष हाजी मेहबूब टी ने मुस्लिम समाज के लोगों को नववर्ष की मुबारकबाद देते हुए नए साल में भाईचारा, शांति और खुशहाली की कामना की।
शाम को भैरूघाट चौराहे पर जूनी पाली मोहर्रम कमेटी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में जूनी पाली मोहर्रम के पूर्व लाइसेंसदार मोहम्मद यूसुफ पठान, लाइसेंसदार मोहम्मद सलीम एवं रुस्तम शाह सहित समाज के वरिष्ठ जनों ने परंपरागत रूप से चिराग रोशन किया।
इस अवसर पर पिंजारा समाज के सदर हाजी मोहम्मद यूसुफ पिंजारा, शकील अहमद नागौरी, मोहम्मद रफीक अब्बासी, मोहम्मद सत्तार पठान, आरिफ पिंजारा, फारूक रंगीला, अकरम सिपाही, दीन मोहम्मद, बाबू शाह, हाजी सादिक भाई, सलीम मिस्त्री, आसिफ पिंजारा, शफी मोहम्मद सिपाही, ताहिर अली, इंसाफ अली, इमरान हांडा सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग उपस्थित रहे।

