सोजत, 22 जुलाई। समय पर सही पहचान, त्वरित उपचार और चिकित्सकीय टीम की संवेदनशीलता ने 9 वर्षीय मासूम मनीषा को नया जीवन दे दिया। गंभीर एनीमिया (Severe Anemia) से जूझ रही बच्ची का हीमोग्लोबिन महज 3 ग्राम था, लेकिन जिला चिकित्सालय सोजत की सात दिन की सतत चिकित्सा के बाद यह बढ़कर 12 ग्राम हो गया और बच्ची स्वस्थ होकर घर लौट सकी।
जिला चिकित्सालय सोजत के पीएमओ डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि 17 जुलाई को निजी अस्पताल से रेफर होकर आई मनीषा पुत्री नारायण सिंह की हालत बेहद गंभीर थी। बच्ची अत्यधिक कमजोर थी, उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और शरीर में खून की भारी कमी के लक्षण दिखाई दे रहे थे। चिकित्सकों ने तत्काल शिशु वार्ड में भर्ती कर आवश्यक जांचें कराईं, जिनमें हीमोग्लोबिन केवल 3 ग्राम पाया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकीय टीम ने बिना देरी किए ब्लड बैंक प्रभारी से संपर्क किया। डोनर उपलब्ध नहीं होने के बावजूद चैरिटी के माध्यम से सुरक्षित रक्त की तत्काल व्यवस्था की गई और बच्ची को समय पर रक्त चढ़ाया गया। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने लगातार निगरानी, दवाइयों, पोषण संबंधी परामर्श और समर्पित उपचार से उसकी स्थिति में तेजी से सुधार किया।
सात दिनों के सफल उपचार के बाद 22 जुलाई को बच्ची का हीमोग्लोबिन बढ़कर 12 ग्राम हो गया। पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे आवश्यक परामर्श और फॉलोअप निर्देशों के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस सफल उपचार में पीएमओ डॉ. राजेश गुप्ता के निर्देशन में डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. भवानी सिंह, नर्सिंग अधीक्षक ममता चौधरी तथा नर्सिंग टीम की ललिता, बोराराम, सुमित्रा और हसमत बानो ने उत्कृष्ट टीमवर्क और समर्पण का परिचय दिया।
चिकित्सालय प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि बच्चों में कमजोरी, अत्यधिक थकान, सुस्ती या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर उपचार से गंभीर एनीमिया जैसी स्थिति में भी जीवन बचाया जा सकता है।
“चिकित्सक का एक ही धर्म— सेवा ही परम धर्म।” जिला चिकित्सालय सोजत की यह सफलता इसी भावना का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।


