पाली । नगर निगम के 65 वार्डों के लिए सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन पाली में राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर रहीं। टिकट वितरण को लेकर उपजे असंतोष के चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों में भारी बगावत देखने को मिली। कांग्रेस पार्टी द्वारा अंतिम समय में प्रत्याशियों की सूची जारी करते ही पार्टी के भीतर भूचाल आ गया और जिला अध्यक्ष शिशुपाल सिंह को कार्यकर्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ा।
टिकट बेचने के गंभीर आरोप और अस्पताल में हंगामा
कांग्रेस पार्टी की सूची जारी होते ही शहर अध्यक्ष हकीम भाई ने नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि टिकट 5-5 लाख रुपये में बेचे गए हैं। कई अन्य दावेदारों ने भी आरोप लगाया कि अंतिम समय तक टिकट पक्का करने का आश्वासन देकर उनके साथ धोखा किया गया है।
इस खुलासे के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया और वे जिला अध्यक्ष शिशुपाल सिंह के पीछे दौड़ पड़े। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि जिला अध्यक्ष को बचने के लिए एक निजी अस्पताल में घुसकर शरण लेनी पड़ी। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के बाहर जमकर नारेबाजी की और अंदर घुसने का प्रयास किया। हंगामे की सूचना मिलते ही कोतवाल रविंदर खींची भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे और बल प्रयोग कर धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं को खदेड़ा।
दोनों दलों में बगावत और निर्दलीयों की एंट्री
टिकट वितरण से असंतुष्ट दोनों पार्टियों के कई दिग्गज और पुराने कार्यकर्ता बागी हो गए हैं:
कांग्रेस में फूट : शहर अध्यक्ष द्वारा टिकट बेचने के आरोपों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है।

भाजपा में बगावत: टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा से लंबे समय से जुड़े कांतिलाल वैष्णव (वार्ड 41), पूर्व पार्षद जय जसवानी (वार्ड 13), निर्मल जोशी (वार्ड 14), जय थावानी (वार्ड 15) और खुशबू सोनी (वार्ड 46) ने निर्दलीय ताल ठोक दी है।
पूर्व सभापति मैदान में : पूर्व सभापति कुसुम सोनी ने भी भाजपा द्वारा बाहरी प्रत्याशी (शिवजी प्रजापत) को टिकट दिए जाने से नाराज होकर निर्दलीय के रूप में अपना पर्चा दाखिल किया है।
बागियों के मैदान में उतरने से कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट बैंक में सेंधमारी तय मानी जा रही है, जिससे पाली निकाय चुनाव के मुकाबले बेहद रोमांचक हो गए हैं।


