सोजत नगरपालिका चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न, अब नतीजों पर अटकलों का बाजार गर्म।
सोजत सिटी। नगरपालिका चुनाव 2026 का मतदान शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न होने के साथ ही शहर की सियासत अब एक नए दौर में प्रवेश कर गई है। मतदान खत्म होते ही अगले दिन से ही शहर के चौराहों, बाजारों, चाय की थड़ियों और राजनीतिक बैठकों में एक ही चर्चा सुनाई दे रही है—आखिर सोजत नगरपालिका में किसका बोर्ड बनेगा?
40 वार्डों में हुए चुनाव में मतदाताओं ने प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम में कैद कर दिया है। अब परिणाम 14 सितंबर को सामने आएंगे, लेकिन उससे पहले राजनीतिक जानकारों और आम मतदाताओं ने अपने-अपने आंकलन शुरू कर दिए हैं। कोई कांग्रेस को मजबूत स्थिति में बता रहा है तो कोई भाजपा के पक्ष में बहुमत का दावा कर रहा है। वहीं कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों के प्रदर्शन को लेकर भी खासा उत्साह और चर्चा है।
40 वार्डों का गणित, किसके पक्ष में जाएगा समीकरण?
सोजत नगरपालिका के 40 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी चुनाव मैदान में ताल ठोकी थी। कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय और कुछ स्थानों पर बहुकोणीय रहा। ऐसे में कई वार्डों के नतीजे सीधे तौर पर बोर्ड के बहुमत के गणित को प्रभावित कर सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा उन वार्डों की है जहां निर्दलीय प्रत्याशी मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। यदि भाजपा या कांग्रेस किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
कहीं व्यक्तिगत प्रभाव तो कहीं पार्टी का चेहरा
इस चुनाव में कई वार्डों में मुकाबला केवल पार्टी के चुनाव चिह्न तक सीमित नहीं रहा। प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़, वार्ड में किए गए काम, स्थानीय मुद्दे, पारिवारिक प्रभाव और मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क ने भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है। यही कारण है कि मतदान के बाद भी किसी एक दल के पक्ष में स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है।
चाय की थड़ी से लेकर राजनीतिक बैठकों तक ‘किसका बोर्ड?’
मतदान समाप्त होने के बाद अब शहर में चुनावी चर्चाओं ने नया रूप ले लिया है। समर्थक अपने-अपने प्रत्याशियों की जीत के दावे कर रहे हैं। वार्डवार मतदान प्रतिशत, बूथवार वोटिंग और प्रत्याशियों के समर्थकों की मौजूदगी को आधार बनाकर जीत-हार के आंकड़े लगाए जा रहे हैं।
भाजपा समर्थक अपने प्रत्याशियों के पक्ष में मजबूत मतदान का दावा कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस समर्थक कई वार्डों में बदलाव की हवा होने की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थकों का मानना है कि इस बार कई वार्डों में जनता ने पार्टी से ज्यादा स्थानीय चर्चित चेहरे को प्राथमिकता दी है।
14 सितंबर को खुलेगा जीत-हार का राज
फिलहाल 40 वार्डों की ईवीएम में प्रत्याशियों का राजनीतिक भविष्य बंद है। हर खेमे में अपने-अपने दावे और आंकड़े हैं, लेकिन वास्तविक तस्वीर मतगणना के बाद ही साफ होगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोजत में भाजपा या कांग्रेस में से कोई दल स्पष्ट बहुमत हासिल करेगा, या फिर निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे?
इन सवालों का जवाब अब मतगणना के दिन ही मिलेगा। तब तक सोजत की सियासी गलियों में ‘किसका बोर्ड?’ की चर्चा लगातार जारी रहने वाली है।


