सोजत। हजरत मस्तानशाह बाबा का 123वां उर्स बुधवार रात पुरी अकीदत, भाईचारे और सूफियाना रंग के बीच हर्षोल्लास से मनाया गया। ईद मिलादुन्नबी एवं चादर के जुलूस के दरगाह पहुंचने पर दरगाह खादिम नजीरशाह बापू की देखरेख में बड़ी संख्या में मौजूद जायरीनों और अकीदतमंदों ने चादर शरीफ मजार शरीफ पर पेश की। इस दौरान देश में अमन-चैन, शांति और खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गईं।
कांच के बॉक्स में रखी रही नूरशाह बाबा की मुबारक चादर
इस बार उर्स का मुख्य आकर्षण हजरत नूरशाह बाबा की वह मुबारक चादर (कंबल) रही, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपने हयाती जीवन में किया था। अकीदतमंदों को इसकी ज्यारत कराने के उद्देश्य से इसे विशेष रूप से तैयार किए गए कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखा गया। मुबारक चादर की ज्यारत के लिए बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे।
रातभर गूंजी सूफियाना कव्वालियां
रात 10 बजे बाद आयोजित महफिल-ए-कव्वाली में मशहूर सूफी कव्वाल नदीम अंदाज और शौकत अंदाज ने अपने पूरे ग्रुप के साथ एक से बढ़कर एक कव्वालियां पेश कर समां बांध दिया। शानदार सूफियाना प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर रात तक झूमने पर मजबूर कर दिया। कव्वाली का कार्यक्रम सुबह करीब 5 बजे तक चला।
आसपास के गांव-कस्बों से भी पहुंचे जायरीन
उर्स में सोजत शहर के साथ आसपास के गांवों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। अकीदतमंदों ने मस्तानशाह बाबा की दरगाह पर अकीदत के फूल पेश किए तथा अपने और अपने परिवार की खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं। पूरे कार्यक्रम के दौरान दरगाह परिसर में श्रद्धा और भाईचारे का माहौल बना रहा।
अतिथियों का किया स्वागत
कव्वाली कार्यक्रम में पहुंचे आसिफ मिर्जा (जैतारण), वसीम रिजवी (सोजत रोड), सद्दाम शेख (सोजत रोड), मोहम्मद दानिश (बगड़ी), हनुमान गुर्जर, गणेश भाई और कीर्तिमान सिंह का दरगाह कमेटी की ओर से साफा पहनाकर एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।
उर्स की व्यवस्थाओं में दरगाह कमेटी के सदर मोहम्मद साकीर राजा, मोहसिन सैयद, अकबर पठान, नाजीम सिलावट, जुबैर खान, इरफान बागड़ी, राजू सिद्दीकी, अकील पठान, शहजाद सिलावट, सरफराज सिलावट, रफिक सिपाही, तनवीर सिलावट एवं आसिफ सिलावट सहित कमेटी के सदस्य जुटे रहे।


