ज्ञापन में बताया गया कि मनरेगा योजना देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लागू की गई थी, जो ग्रामीण भारत के गरीब, मजदूर एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए एक सशक्त सामाजिक सुरक्षा कवच है। योजना के अंतर्गत ग्राम सभा के माध्यम से रोजगार का चयन, स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना तथा मजदूरों की मांग पर कार्य उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।
शिक्षक प्रकोष्ठ ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार द्वारा मनरेगा के नाम में परिवर्तन कर इसके मूल स्वरूप और उद्देश्य को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार’ जैसी योजनाओं में मनरेगा जैसे स्पष्ट और अधिकार आधारित प्रावधान नहीं हैं, जिससे मजदूरों के अधिकारों का हनन हो रहा है। साथ ही राज्यों के अधिकारों को सीमित कर केंद्र सरकार के हाथों में अधिक शक्ति सौंपी जा रही है।
जिला अध्यक्ष दिलदार अली सोलंकी ने राष्ट्रपति से मांग की कि मनरेगा को उसके मूल नाम और स्वरूप में यथावत रखा जाए तथा वर्ष 2025 में परिवर्तित की गई योजनाओं को तत्काल वापस लिया जाए, ताकि ग्रामीण मजदूरों को उनका अधिकारपूर्ण रोजगार सुनिश्चित हो सके।
ज्ञापन सौंपते समय शिक्षक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के नाम और प्रावधानों से छेड़छाड़ बंद नहीं की गई तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।
