सोजत। मध्यस्थता एवं कंसीलिएशन प्रोजेक्ट, नई दिल्ली के तत्वावधान में शनिवार को जोधपुर स्थित राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक दिवसीय रोल प्ले ट्रेनिंग सेशन का आयोजन किया गया। इसमें सोजत न्यायालय से आठ अधिवक्ता मध्यस्थों ने सहभागिता निभाते हुए मध्यस्थता प्रक्रिया की बारीकियों और प्रभावी कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वंदे मातरम् गीत के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जोधपुर महानगर सत्यनारायण व्यास, जिला एवं सत्र न्यायाधीश जोधपुर शिवानी सिंह, विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश रामावत, मनीष हरजाई एवं सुमन सारण ने प्रभावी उद्बोधन देते हुए मध्यस्थता के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में जिला न्यायाधीश एसीडी संख्या-1 मनीष अग्रवाल एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पाली सिद्धार्थ सान्दु भी उपस्थित रहे।
मध्यस्थता से सुलभ और त्वरित न्याय पर जोर…
रोल प्ले ट्रेनिंग सेशन में वरिष्ठ प्रशिक्षक अर्चना मिश्रा एवं प्रमिला आचार्य ने मध्यस्थता विषय का परिचय, इसकी आवश्यकता एवं प्रक्रिया के साथ ही मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी।
प्रशिक्षकों ने बताया कि मध्यस्थता के माध्यम से पक्षकार आपसी समझाइश एवं संवाद के जरिए विवादों का समाधान कर सकते हैं। इससे न्यायिक प्रक्रिया को सरल, सस्ता एवं त्वरित बनाने में मदद मिलती है। उन्होंने मध्यस्थता के दौरान पक्षकारों के बीच संवाद स्थापित करने, विवादों को समझने तथा आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
सोजत के आठ अधिवक्ता मध्यस्थों ने लिया प्रशिक्षण…
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पाली तथा तालुका विधिक
सेवा समिति सोजत की अध्यक्ष एवं एडीजे श्रीमती रेखा रानी के निर्देशानुसार सोजत न्यायालय से आठ अधिवक्ता मध्यस्थों ने प्रशिक्षण सत्र में भाग लिया।
इसमें सोजत बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आनंदीलाल भाटी, ताराचंद भाटी, अधिवक्ता मुजीबुर्रहमान टाक, सुरेश कुमार सेन, मनोज कुमार चौहान, नवनीत गहलोत, अशोक गहलोत एवं विक्रम सिंह नादावत शामिल रहे। वहीं मारवाड़ जंक्शन से नरेंद्र सिंह ने भी सहभागिता निभाई।
विभिन्न न्यायालयों के मध्यस्थों की सहभागिता…
एक दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में पाली, जोधपुर, पीपाड़, बिलाड़ा, बालोतरा, फलोदी, बाड़मेर एवं मारवाड़ जंक्शन सहित विभिन्न न्यायालयों से आए मध्यस्थों ने भाग लिया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य मध्यस्थों की कार्यकुशलता को बढ़ाना, विवादों के समाधान में संवाद एवं आपसी सहमति की भूमिका को मजबूत करना तथा न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना रहा।

