पाली। ज़िले के सबसे बड़े अस्पताल, बांगड़ मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय की स्वास्थ्य सुविधाएँ आए दिन चरमरा रही हैं। एक्स-रे मशीन और सोनोग्राफी मशीन का बार-बार खराब होना अब यहाँ की नियति बन चुका है, जिसका सीधा खामियाज़ा दूर-दराज़ से आने वाले मरीज़ों को भुगतना पड़ रहा है।
लंबी कतारों में मरीज़ों की दुर्दशा:
अस्पताल में नियमित रूप से एक्स-रे मशीन खराब होने की खबरें आती रहती हैं। नतीजतन, ज़रूरी जाँच के लिए मरीज़ों को रोज़ाना लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ता है। घंटों इंतजार के बाद भी जब पता चलता है कि मशीन खराब है, तो दर्द से कराहते मरीज़ों को या तो अगले दिन आने पर मजबूर होना पड़ता है, या फिर निजी केंद्रों पर महँगी जाँच करवाने के लिए विवश होना पड़ता है।
यही हाल सोनोग्राफी मशीन का भी है, जिसके अचानक ठप हो जाने से गर्भवती महिलाओं और अन्य गंभीर मरीज़ों की जाँच प्रभावित होती है।
व्यवस्था पर सवाल:
एक तरफ बांगड़ अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं की ऐसी बदहाली अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है। मरीज़ और उनके परिजन पूछ रहे हैं कि लाखों-करोड़ों की मशीनें आखिर इतनी जल्दी-जल्दी खराब क्यों हो रही हैं? क्या मशीनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है?
प्रशासन से गुहार:
मरीज़ों और सामाजिक संगठनों की ज़िला प्रशासन से मांग है कि अस्पताल की जाँच मशीनों को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए और उनके उचित रखरखाव के लिए एक स्थायी मैकेनिज़्म स्थापित किया जाए ताकि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें।


