पाली। इबादत के मुकद्दस महीने रमजान में जहाँ हर कोई नेकियों की तलाश में रहता है, वहीं राजस्थान के पाली शहर के रहने वाले एक ऑटो चालक अयूब सुलेमानी ने खिदमत-ए-खल्क (मानवता की सेवा) की एक मिसाल पेश की है। अयूब पिछले कई वर्षों से रमजान के दौरान अपने ऑटो में रोजेदारों को मुफ्त सफर करवा रहे हैं।
मंजिल तक का सफर, बिना किसी किराए के
भीषण गर्मी और रोजे की शिद्दत के बीच, जब लोग अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए परेशान होते हैं, तब अयूब सुलेमानी का ऑटो उनके लिए किसी राहत से कम नहीं होता। शहर की सड़कों पर अपना ऑटो दौड़ाते अयूब जैसे ही किसी रोजेदार को देखते हैं, उन्हें सम्मान के साथ बैठाते हैं और उनकी मंजिल तक छोड़ते हैं। इस सफर के बदले वे एक रुपया भी नहीं लेते।
मकसद: सिर्फ रब की रजा
जब अयूब से इस पहल के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब बेहद सादगी भरा और दिल को छू लेने वाला था। उन्होंने बताया:
“मैं एक छोटा सा ऑटो चालक हूँ, ज्यादा बड़ा दान-पुण्य तो नहीं कर सकता, लेकिन अल्लाह ने मुझे यह हुनर दिया है। मैं चाहता हूँ कि मेरे इस छोटे से प्रयास से रोजेदारों को सहूलियत मिले। मेरा मकसद बस यही है कि मेरी इस खिदमत से मेरा ‘रब’ मुझसे राजी हो जाए।”
अयूब सुलेमानी
शहर में हो रही है सराहना
अयूब सुलेमानी की इस निस्वार्थ सेवा की पूरे पाली शहर में चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक लोग उनकी इस सोच को सलाम कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आज के दौर में जहाँ हर कोई मुनाफे के पीछे भाग रहा है, वहां अयूब जैसे लोग हमें याद दिलाते हैं कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।

नेक नियत की मिसाल
अयूब का यह कदम यह साबित करता है कि सेवा करने के लिए बड़ी तिजोरी की नहीं, बल्कि बड़े दिल की जरूरत होती है। रोजेदारों की दुआएं लेते अयूब आज उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं।


