पाली। 25 जून 1975 को देश पर थोपे गए आपातकाल के 51 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय, पाली में जोधपुर संभाग स्तरीय ‘लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भाजपा ने देशव्यापी आह्वान के तहत पाली में भी 25 जून को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाने वाले सेनानियों को नमन किया।
आपातकाल लोकतंत्र पर सबसे बड़ा काला धब्बा: अरुण चतुर्वेदी
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री अरुण चतुर्वेदी ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। तत्कालीन सरकार ने सिर्फ अपनी सत्ता बचाने के लिए संविधान की हत्या कर दी थी। लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले लाखों देशभक्तों को जेलों में ठंसकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। नई पीढ़ी को यह बताना जरूरी है कि हमारी अभिव्यक्ति की आजादी कितनी कीमती है और इसके लिए क्या कुर्बानियां दी गई हैं।”
सेनानियों का संघर्ष व्यर्थ नहीं गया: जोगेश्वर गर्ग
राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले हर सेनानी ने देश के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। आज उन्हीं के संघर्ष की बदौलत देश में लोकतांत्रिक मूल्य सुरक्षित हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। वहीं पूर्व राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने युवाओं से अपील की कि वे आपातकाल के इतिहास को पढ़ें ताकि जान सकें कि कैसे प्रेस पर सेंसरशिप लगाकर लोकतंत्र को कुचला गया था।
पैर छूकर किया सेनानियों का वंदन
जिला अध्यक्ष सुनील भंडारी की अध्यक्षता में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में मंच पर मौजूद सभी वरिष्ठ नेताओं ने लोकतंत्र सेनानियों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी सेनानियों को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। पूरा परिसर ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों से गुंजायमान हो उठा।
ये रहे उपस्थित:
समारोह में मेघराज लोहिया, भरत मोदी, बालोतरा जिला अध्यक्ष भुवनसिंह, जोधपुर देहात जिला अध्यक्ष करणसिंह नेतरा, पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, विजयसिंह राजपुरोहित, जिला महामंत्री दिग्विजयसिंह राठौड़, रामकिशोर साबू, महेंद्र बोहरा सहित 150 से अधिक लोकतंत्र सेनानी और सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन भरत त्रिवेदी ने किया।


