सोजत। आजादी के 79 वर्षों के सफर में सोजत में सबसे प्रभावशाली जनप्रतिनिधि, उपखण्ड अधिकारी एवं पुलिस अधिकारी कौन रहे? इसी विषय पर सोजत महोत्सव समिति द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आमजन से राय आमंत्रित की गई। रायशुमारी में प्रबुद्ध नागरिकों, अधिवक्ताओं, शिक्षकों, कर्मचारियों, युवाओं तथा महिलाओं ने उत्साहपूर्वक अपनी भागीदारी निभाई।
समिति सचिव चेतन व्यास ने बताया कि प्राप्त राय के संकलन के आधार पर क्षेत्र के विकास कार्यों, जनसुनवाई, प्रशासनिक कार्यशैली एवं जनता से जुड़ाव को प्रमुख आधार माना गया।
जनप्रतिनिधियों में पूर्व कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे रहे प्रथम पसंद
रायशुमारी में पूर्व वन, पर्यावरण, पेट्रोलियम एवं खनिज मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे को सोजत के सबसे प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के रूप में सर्वाधिक समर्थन मिला। प्रतिभागियों का मानना रहा कि उन्होंने विकास कार्यों को गति देने और आमजन के कार्यों को प्राथमिकता देने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
दूसरे स्थान पर विधायक शोभा चौहान एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री दीवान माधव सिंह संयुक्त रूप से रहे, जबकि पुखराज कालानी को तीसरी पसंद के रूप में चुना गया।
उपखण्ड अधिकारियों में महेन्द्र सुराणा रहे सर्वश्रेष्ठ
प्रशासनिक कार्यशैली के आधार पर तत्कालीन एसडीएम महेन्द्र सुराणा को सर्वसम्मति से सर्वश्रेष्ठ उपखण्ड अधिकारी माना गया। दूसरे स्थान पर शैलेन्द्र श्रीमाली तथा तीसरे स्थान पर नंद किशोर राजौरा रहे। इसके अलावा पुखराज सैन, भागीरथ विश्नोई, अयूब खां एवं सुनीता डागा के कार्यों की भी प्रतिभागियों ने सराहना की।
पुलिस अधिकारियों में विकास कुमार को मिली सर्वाधिक पसंद
रायशुमारी में तत्कालीन प्रशिक्षु आईपीएस विकास कुमार को सोजत के इतिहास का अब तक का सर्वश्रेष्ठ पुलिस अधिकारी बताया गया। दूसरे स्थान पर डॉ. मृत्युंजय मिश्रा तथा तीसरे स्थान पर हेमन्त जाखड़ रहे। वहीं धीरेन्द्र सिंह खींची, गोपाल सिंह राठौड़ एवं श्वेता धनखड़ के कार्यों की भी लोगों ने प्रशंसा की।
इन लोगों ने दी अपनी राय…
रायशुमारी में अधिवक्ता गजेन्द्र मेहता, शिक्षा जगत से जुड़े लक्ष्मणराम पालड़िया, श्यामलाल व्यास, सत्तू सिंह भाटी, मनोहर पालड़िया, हरीश गहलोत, राजकुमार चौधरी, मो. खालिद, अशोक कुमार, प्रियंका, दुर्गाराम, विनीत राय, अकरम खान, मदन गहलोत, गजेन्द्र सहित अनेक नागरिकों ने अपनी संक्षिप्त टिप्पणियां और सुझाव भी प्रस्तुत किए।
समिति के अनुसार इस रायशुमारी का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के प्रति जनता की भावना को जानना था। प्राप्त राय पूरी तरह नागरिकों के व्यक्तिगत अनुभव एवं विचारों पर आधारित है।

