पाली।** शहर में शुक्रवार को मुस्लिम समाज द्वारा मोहर्रम का पर्व बेहद गमगीन और अकीदत के माहौल में मनाया गया। कर्बला के शहीद हजरत इमाम हुसैन और अब्बास अलमदार की शहादत की याद में नम आंखों से ताजियों के जुलूस निकाले गए। ढोल-नगाड़ों और झांझ-ताशों के बीच शहनाई की मातमी धुन ने पूरे माहौल को शोक संतप्त कर दिया।

मस्जिदों और घरों में उमड़े मोमीन, की इबादत
पाली जिला मुस्लिम समाज के उपाध्यक्ष **हाजी मेहबूब टी** ने बताया कि मोमिनों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में रोजा रखकर मस्जिदों का रुख किया।
शहर की विभिन्न मस्जिदों में तकरीर, नात ख्वानी और तिलावते कुरान की गई।
मस्जिदों में ‘जिक्रे इमाम हुसैन’ कर जंगनामा पढ़ा गया और नमाज अदा कर शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की गई।
महिलाओं ने घरों में मिलाद और तकरीरी मजलिसें सजाकर कर्बला के शहीदों को याद किया।

अखाड़े के जांबाजों ने दिखाए हैरतअंगेज करतब
अखाड़ा इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष इंसाफ सोलंकी के अनुसार, जुलूस में विभिन्न अखाड़ों के उस्तादों और शागिर्दों ने अपनी कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया।
प्रमुख प्रदर्शन:अखाड़े के शागिर्दों ने डान पट्टा, लकड़ी की चाल, शमशीर (तलवार) चलाना, तलवार का वार और ढाल से बचाव जैसे हैरतअंगेज करतब दिखाए।
इस दौरान जनसैलाब *”शाबाश तेरे उस्ताद को”* और *”बहुत खूब”* जैसे जुमलों से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाता नजर आया। पट्टों (खिलाड़ियों) ने *”अली का लश्कर या इमाम, या हुसैन”* के जोशीले नारे लगाकर कर्बला के मंजर की याद ताजा कर दी।

इनके नेतृत्व (कयादत) में उतरे अखाड़े:
अखाड़ा मीर अजीम घोसी वाड़ा:लाइसेंसदार सलमान रोशन अली मोयल एवं उस्ताद चांद मोहम्मद घोसी
अखाड़ा शेख चिराग: लाइसेंसदार हाजी फकीर मोहम्मद चढ़वा
जंगीवाड़ा अखाड़ा:लाइसेंसदार हाजी गुलाम नबी पिंजारा
भेरूघाट अखाड़ा:अब्दुल सत्तार पठान एवं मोहम्मद फारूक पठान
गंगा-जमुनी तहजीब: श्रद्धालुओं में मची होड़, इंच-दर-इंच बढ़ा जुलूस
मुस्लिम समाज के जिला प्रवक्ता **शकील अहमद नागौरी** ने बताया कि केरिया दरवाजा से जाकिर हुसैन रोड का कुछ ही मिनटों का रास्ता तय करने में जुलूस को **7 से 8 घंटे** का समय लगा। ताजिये इंच-दर-इंच अपने मुकाम की ओर बढ़ते रहे।
अमन-चैन की दुआ: रास्ते में हिंदू-मुस्लिम श्रद्धालुओं में मोहर्रम के नीचे से गुजरने की होड़ मची रही। लोगों ने मन्नतें मांगीं और मोहर्रम पर फूल माला, नोटों व सूखे मेवों के सेहरे तथा मिठाई का नजराना पेश कर अमन-चैन व खुशहाली की दुआ मांगी।
जगह-जगह खिदमत: समाज के लोगों द्वारा जगह-जगह दूध, शरबत, छबील, मिठाई, हलीम व तरह-तरह के पकवान बनाकर लोगों को शीरनी (प्रसाद) के रूप में बांटे गए।
अलग-अलग मोहल्लों से मिलकर आगे बढ़ा कारवां
पीठ का मोहर्रम: शुक्रवार दोपहर 3 बजे केरिया दरवाजा से लाइसेंसदार **हाजी मोहम्मद उमर लोहार** के नेतृत्व में रवाना हुआ। बादशाह का झंडा पहुंचने पर जाहिद गौरी के नेतृत्व में ‘गौरी युवा संगठन’ के मंच पर अखाड़ा, मोहर्रम कमेटी और प्रशासनिक अधिकारियों का सम्मान किया गया।
चुडिगर मोहर्रम: चुडिगर मोहल्ला से लाइसेंसदार **मोहम्मद शाहिद पिन्नु** के नेतृत्व में मुथों का बास होते हुए पीठ के मोहर्रम के साथ मिला।
खेरादियांन मोहर्रम: लाइसेंसदार **मोहम्मद इकबाल खेरादी** के नेतृत्व में नवलखा रोड, सिपाहियों का बास, भिश्ती गली, गुलजार चौक, गंछों का बास होते हुए जंगीवाड़ा पहुंचा।
पलटन का मोहर्रम:लाइसेंसदार मोहम्मद इल्यास कुरैशी के साथ मिलकर सभी मोहर्रम जंगीवाड़ा चौक, बॉम्बे फेल्ट, डागा जी का मकान, दाल मिल होते हुए पुराना बस स्टैंड और नवलखा रोड जाकिर हुसैन चौक पहुंचे।
जूनी पाली का मोहर्रम: लाइसेंसदार मोहम्मद सलीम पिंजारा के नेतृत्व में सोमनाथ रोड, प्यारा चौक होते हुए जाकिर हुसैन चौक पहुंचकर संपन्न हुआ।
जुलूस के सफल और शांतिपूर्ण संचालन में जिला प्रशासन के सहयोग के साथ-साथ मुस्लिम समाज की कमेटियों, सामाजिक संगठनों और गणमान्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोपहर 3 बजे से शुरू होकर देर रात समापन स्थल **डॉ. जाकिर हुसैन प्याऊ** तक सभी ताजियों को सुरक्षित पहुंचाया गया।
जुलूस के समापन पर जिला मुस्लिम समाज के सदर मोहम्मद हकीम, विधायक भीमराज भाटी, शमीम मोतीवाला, हाजी मेहबूब टी, मोहम्मद सलीम मिस्कीन, महबूब धानवाला और राजू भाई रंगरेज सहित अन्य समाज बंधुओं ने सभी का स्वागत किया। अंत में सदर मोहम्मद हकीम भाई ने शांतिपूर्ण आयोजन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस मुस्तैदी का आभार व्यक्त किया।
व्यवस्था संचालन में इनका रहा विशेष सहयोग:
सलीम मिस्कीन, मोहम्मद रफीक अब्बासी, जीशान अली, अमजद अली रंगरेज, जाहिद गोरी, जावेद सिरोहा, तारिक अली चूडिगर, हाजी हारून अली रंगरेज, राजू नवाब, मेहराज अली, अनवर भाई सोजत वाला, रमजान सामरिया, यासीन रॉयल, प्रिंस गोरी, फिरोज सामरिया, यासीन शबावत, अस्कर कुरैशी, अकरम अजमेरी, यासीन लोहार, आबिद चढ़वा, मक्सूद अली, आमीन अली रंगरेज़, तालिब अली, अकरम खिलेरी, पार्षद प्रतिनिधि मोहसिन खत्री, शहजाद शेख, हाजी इंसाफ सोलंकी सहित समाज के कई गणमान्य लोग मुस्तैद रहे।
