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‘राजस्थान का दूध सागर’, 182 फीट ऊंचाई से बहता भील बेरी झरना, प्रकृति का अद्भुत सौन्दर्य निहारने उमड़ने लगी सैलानियों की भीड़।

अकरम खान की रिपोर्ट।

मानसून की मेहरबानी के साथ अरावली की वादियों में बसा राजस्थान का सबसे ऊंचा और प्रसिद्ध भील बेरी झरना एक बार फिर पूरे शबाब पर बह निकला है। करीब 182 फीट की ऊंचाई से दूधिया सफेद जलधारा जब चट्टानों से टकराते हुए नीचे गिरती है, तो नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं लगता। यही वजह है कि इस झरने की तुलना फिल्म ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में दिखाए गए मशहूर दूधसागर झरने से की जाती है।

मारवाड़ और मेवाड़ की सरहद पर स्थित भील बेरी में सावन की अच्छी बारिश के बाद दो वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह प्राकृतिक झरना फिर से जीवंत हो उठा है। झरने के बहते ही पर्यटकों, फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों की भीड़ यहां पहुंचने लगी है।

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह स्थल अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों, घने जंगलों और पक्षियों की मधुर आवाजों के बीच बसा है। समुद्र तल से अधिक ऊंचाई और मनमोहक वातावरण के कारण भील बेरी को “राजस्थान का दूध सागर” और “राजस्थान का मेघालय” भी कहा जाता है। यहां का प्राकृतिक नजारा पर्यटकों को उत्तराखंड और दक्षिण भारत की खूबसूरत वादियों का एहसास कराता है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एक बार शुरू होने के बाद यह झरना करीब दो महीने तक लगातार बहता रहता है, जिससे आने वाले दिनों में यहां पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।

सुरक्षा बरतने की अपील…

बारिश के मौसम में झरने का जलप्रवाह काफी तेज हो जाता है। पहाड़ी रास्ता दुर्गम और फिसलनभरा होने के साथ ऊंचाई से पानी के साथ छोटे-बड़े पत्थर गिरने का भी खतरा रहता है। ऐसे में वन विभाग ने पर्यटकों से सुरक्षा घेरे के भीतर रहकर ही प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने और किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाने की अपील की है।

भील बेरी झरना इन दिनों राजस्थान में मानसून पर्यटन का सबसे आकर्षक केंद्र बन गया है, जहां प्रकृति का अद्भुत और मनमोहक रूप हर किसी को अपनी ओर खींच रहा है।

Akram Khan

Written by Akram Khan

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