यह स्टोरी केवल एक सफल प्रसव की नहीं, बल्कि समय पर उपचार, संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं और समर्पित चिकित्सकीय टीम द्वारा एक परिवार की खुशियां सुरक्षित रखने की मिसाल है।
सोजत सिटी। समय पर मिला उपचार और चिकित्सकों की सतर्कता कई बार एक परिवार की खुशियां सुरक्षित कर देती है। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण सोजत सिटी जिला अस्पताल में सामने आया, जहां लूणावास गांव निवासी एक महिला की हाई रिस्क गर्भावस्था का सफलतापूर्वक सामान्य प्रसव कराकर मां और नवजात दोनों की जान बचाई गई।
अस्पताल पहुंचने पर महिला का हीमोग्लोबिन मात्र 7.7 ग्राम/डीएल था। खून की गंभीर कमी के कारण मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान खतरे में थी। चिकित्सकों ने उन्हें तत्काल हाई रिस्क श्रेणी में भर्ती कर उपचार शुरू किया। एफसीएम (FCM) इंजेक्शन और लगातार चिकित्सकीय निगरानी के बाद उनका हीमोग्लोबिन बढ़कर 10.4 ग्राम/डीएल तक पहुंच गया।
प्रसव पीड़ा शुरू होने पर वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक गहलोत के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ उपचार किया। बेहतर निगरानी और समन्वित चिकित्सा के परिणामस्वरूप महिला का सफल सामान्य प्रसव कराया गया। कुछ ही देर में अस्पताल परिसर नवजात की पहली किलकारी से गूंज उठा और मां-बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहे।
अस्पताल के पीएमओ डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि महिला पहले से चार बच्चों की मां हैं और यह उनकी पांचवीं डिलीवरी थी। गंभीर एनीमिया के कारण यह गर्भावस्था अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन समय पर उपचार और स्वास्थ्य टीम के समर्पित प्रयासों ने संभावित खतरे को खुशियों में बदल दिया।
मां और नवजात को सुरक्षित देखकर परिजनों ने राहत की सांस ली और चिकित्सकों व अस्पताल स्टाफ का आभार व्यक्त किया। परिवार ने डॉक्टरों की सलाह पर स्थायी परिवार नियोजन (नसबंदी) कराने का निर्णय भी लिया।
पाली सीएमएचओ डॉ. विकास मारवाल ने बताया कि इस सफल उपचार में डॉ. पुष्पेंद्र, डॉ. हिमांशी, स्टाफ नर्स स्मिता, शंभूदयाल, सरोज, अनीता, अंजना तथा लेबर रूम के समस्त स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह सफलता केवल एक सुरक्षित प्रसव की कहानी नहीं, बल्कि समय पर उपचार, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और समर्पित चिकित्सकीय टीम की संवेदनशील कार्यशैली का जीवंत उदाहरण है, जिसने एक परिवार की खुशियां सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई।


