पाली। नगर निकाय चुनाव 2026 के नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन सोमवार को पाली नगर निगम कार्यालय के बाहर दिनभर मेले जैसा माहौल नजर आया। प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ ढोल-डीजे की धुन पर पहुंचे तो कई दावेदार कार्यकर्ताओं के कंधों पर सवार होकर नामांकन दाखिल करने पहुंचे। अंतिम दिन बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी पर्चे दाखिल कर भाजपा और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी।

भाजपा से टिकट नहीं मिलने से नाराज कई दिग्गज दावेदारों ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया। इनमें पूर्व सभापति कुसुम सोनी, पूर्व पार्षद किशोर सोमनानी की पत्नी, कांतिलाल वैष्णव, पूर्व पार्षद जय जसवानी, जय थावानी सहित कई नाम शामिल हैं। इन बागी प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से भाजपा के मजबूत माने जाने वाले कई वार्डों में समीकरण बदलने की संभावना है। माना जा रहा है कि ये प्रत्याशी भाजपा के वार्ड बैंक में सेंधमारी कर सकते हैं, जिससे कई वार्डों में मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है।

पौने तीन बजे दोनों दलों ने जमा करवाए सिंबल
नामांकन के अंतिम दिन भाजपा और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष व प्रभारी दोपहर करीब पौने तीन बजे अपने प्रत्याशियों के नामांकन जमा करवाने पहुंचे। वहीं कांग्रेस को दो वार्डों में प्रत्याशियों को पार्टी का सिंबल देने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
इसी दौरान कांग्रेस के सिंबल लेकर पहुंचे जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह के सामने शहर ब्लॉक अध्यक्ष ने टिकट वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। शहर ब्लॉक अध्यक्ष ने टिकट बेचे जाने का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। इस घटनाक्रम से कांग्रेस के भीतर चल रही नाराजगी खुलकर सामने आ गई।
जिलाध्यक्ष के पीछे दौड़े कार्यकर्ता, निजी हॉस्पिटल में घुसकर छुड़ाया पीछा
टिकट वितरण से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आक्रोश यहीं नहीं थमा। कार्यकर्ता कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह के पीछे पड़ गए। स्थिति ऐसी बनी कि जिलाध्यक्ष को एक निजी हॉस्पिटल में प्रवेश कर अपना पीछा छुड़ाना पड़ा।
वहीं टिकट नहीं मिलने से नाराज कुछ लोगों ने निजी हॉस्पिटल में घुसने का प्रयास किया। इसके बाद वे हॉस्पिटल के बाहर सड़क पर ही बैठ गए। सूचना मिलने पर कोतवाल रवींद्र सिंह खींची पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहां से हटाया।
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब पाली निकाय चुनाव में बगावत, निर्दलीय प्रत्याशी और पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के बीच मुकाबला चुनावी तस्वीर को और दिलचस्प बनाने वाला है। आने वाले दिनों में बागी प्रत्याशी किस पार्टी के वोट बैंक में कितनी सेंध लगाते हैं, इसका असर चुनाव परिणामों पर साफ दिखाई दे सकता है।

