पाली। “सोणा आया नी…” जैसी मधुर और सुरीली नात गूंजते ही पाली की गलियां और बाजार दुल्हन की तरह सज उठे। माहौल जश्ने ईद मिलादुन्नबी की खुशियों से सराबोर हो गया है। यह दिन पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब (स.अ.स.) की आमद की खुशी में मनाया जाता है। आज से करीब 1500 साल पहले, मक्का (सऊदी अरब) की पवित्र धरती पर हजरत मोहम्मद साहब (स.अ.स.) का जन्म सुबह-सवेरे “वक्त-ए-सादिक” के समय हुआ था। मुस्लिम धर्मावलंबी इस दिन को रहमतों और बरकतों वाली सबसे पवित्र रातों में मानते हैं।
पाली शहर में सजावट का नजारा
मिलादुन्नबी के मौके पर पाली सहित जिले के सभी कस्बों और गांवों में मुस्लिम मोहल्लों, चौकों और गलियों को विशेष रूप से सजाया गया है। हर जगह रंग-बिरंगी रोशनियों, झालरों और हरे झंडों से सजावट की गई है। शहर-ए-पाली का प्रमुख प्यारा चौक इस मौके पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां की रौनक देखते ही बन रही है।
जुलूस और महफिल-ए-मिलाद की तैयारियां
मिलादुन्नबी के तहत विभिन्न मोहल्लों में महफिल-ए-मिलाद, कुरआन-ख्वानी और नात-ए-पाक के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बच्चे-बूढ़े सभी अपने-अपने घरों को सजाकर इस खुशी में शरीक हो रहे हैं। कई जगह छोटे-छोटे जुलूस भी निकाले जा रहे हैं, जहां नातिया कलाम और दरूद-ओ-सलाम की गूंज से माहौल महक रहा है।
अमन और भाईचारे का पैगाम
इस्लाम धर्मावलंबी इस मौके पर अमन, भाईचारे और मोहब्बत का संदेश देते हैं। धर्मगुरु बताते हैं कि पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब (स.अ.स.) की सीरत पर चलकर ही इंसानियत का असली पैगाम पूरा होता है।


