सोजत। सुरसूरानंदी द्वारा दिगंबरी अखाड़ा के पूज्य संत महंत श्री नरसिंहदास जी महाराज का शनिवार को 97 वर्ष की आयु में देवलोकगमन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही सोजत सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। श्रद्धालुओं, भक्तों और शिष्य परिवार ने इसे धर्म एवं समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
महंत श्री नरसिंहदास जी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन सनातन धर्म, गौसेवा, भक्ति, योग, आयुर्वेद और जनकल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उनके सान्निध्य में हजारों श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त किया और समाज में धार्मिक चेतना का व्यापक प्रसार हुआ।
आयुर्वेद के प्रकांड विद्वान महंत नरसिंहदास जी ने अपने ज्ञान और अनुभव से अनेक असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों का सफल उपचार किया। उनके पास दूर-दूर से आमजन के साथ-साथ बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी स्वास्थ्य लाभ और जीवन की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते थे।
उन्होंने देशभर के प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों का नियमित भ्रमण किया तथा योग को स्वस्थ जीवन का आधार बताते हुए अनेक शिष्यों को योग की शिक्षा प्रदान की। समाज सेवा और धर्म रक्षा के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
महंत श्री नरसिंहदास जी के मार्गदर्शन में गणेश टेकरी (माउंट आबू) तथा नरसिंह द्वारा, सोजत में अनेक धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। सोजत स्थित नरसिंह द्वारा में प्रतिवर्ष नरसिंह जयंती और दशहरा महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता था, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते थे।
महंत श्री के देवलोकगमन पर विभिन्न अखाड़ों के संतों एवं धर्माचार्यों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनके आध्यात्मिक और सामाजिक योगदान को अविस्मरणीय बताया।
उनकी अंतिम यात्रा में महंत गोपालदास जी, बालकदास महाराज, वैशाखीपुरी महाराज, पुखराज पुरी महाराज, कैलाश दवे, जयलाल शर्मा, कानसिंह, सुरेश पंवार, सुरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु एवं नगरवासी शामिल हुए और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
महंत श्री नरसिंहदास जी महाराज का देवलोकगमन धर्म एवं समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके आदर्श, सेवा, त्याग और आध्यात्मिक प्रेरणा सदैव श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करती रहेगी।


