सोजत सिटी। वन्यजीवों की प्रजातियां में शुमार और भारत में अत्यंत दुर्लभ दिखने वाला पैंगोलियन सोजत शहर में एक कॉलोनी में बने पानी के टांके में मिला है। यह दुर्लभ जीव शुक्रवार को वहां मिला था, जिसका वीडियो और जानकारी शनिवार को सामने आई। सोजत के मशहूर स्नेक कैचर अजय कुमार ने उसे सुरक्षित रूप से रेस्क्यू का वन विभाग को सौंप दिया है। 
सबसे लंबी जीव वाला स्तनपाई जानवर पारिस्थितिकी संतुलन के लिए बेहद जरूरी
पैंगोलियन जिसे मारवाड़ी में चींटीखोर कहते हैं, यह पहला ऐसा स्तनपाई (जिसके मुंह में दांत नहीं होते) जानवर है कि उसकी शरीर की लंबाई से उसकी जीभ लगभग दो गुना (40 सेमी) होती है। यह चीटियों और दीमक को खाकर परिस्थितिकीय संतुलन बनता है। चीटियों के बिलों में इसकी लंबी और पतली जीव 40 सेंटीमीटर अंदर जाकर चीटियों को खा जाती है और दीमक का शिकार कर लेती है।
वन विभाग का मानना है कि दीमक को खा जाने से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इस जीव की लंबाई करीब 2 फुट और वजन करीब 8 से 10 किलो होता है। यह अत्यंत दुर्लभ वन्य जीव प्रजाति है जिसकी भारत में करीब 6000 की संख्या है। पाली जिले में पैंगोलियन का मिलन अत्यंत आश्चर्य जनकबात है। हालांकि 2 वर्ष पूर्व जवाई क्षेत्र में एक पैंगोलियन मिला था।
पैंगोलियन राजस्थान के हाडोती क्षेत्र में मिलते हैं। वह भी जहां वन्य जीव अभ्यारण और घने जंगल है। ऐसे में सोजत शहर जैसे आबादी इलाके में इसका आ जाना किसी चमत्कार से काम नहीं है।
पैंगोलियन शरीर की संरचना कुछ ऐसी होती है कि पूरे शरीर पर लोहे के छोटे चद्दर की तरह शल्क होते हैं, वे काफी मजबूत होते हैं शेर जैसा जानवर भी उसे नहीं काट सकता। पैंगोलिन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब भी उसे खतरा महसूस होता है तो वह अपना मुंह अंदर दबाकर पूरे शरीर को गोल गेंद की तरह बना लेता है। जिससे जब भी कोई शिकारी उनका शिकार करने की कोशिश करता है तो उसके नुकीले शल्क को शिकारी के काट नहीं पाते और गोल होने के कारण शिकारी उसे शिकार पर अपनी पकड़ नहीं पता जिससे उसकी जान बच जाती है।


