पाली। कहते हैं जब शौक जुनून बन जाए तो सफलता खुद रास्ता ढूंढ लेती है। पाली जिले के जीवंद कला (नाडोल) गांव की 24 वर्षीय ज्योति कंवर ने अपने बचपन के शौक को आज आय का मजबूत जरिया बना लिया है। वह हर साल करीब 200 से 250 पेंटिंग बेचकर हजारों रुपए की आमदनी कर रही हैं।

कॉलेज की पढ़ाई के साथ ही ज्योति ने अपने हुनर को निखारना शुरू किया। आज वह स्थानीय मेलों में अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं। इन दिनों पाली के रामलीला मैदान में आयोजित सरस राजसखी मेले में उन्होंने अपनी पेंटिंग्स की स्टॉल लगाई है, जहां उनकी कलाकृतियां लोगों का खासा ध्यान आकर्षित कर रही हैं। नेचर, ग्रामीण संस्कृति और पोर्ट्रेट थीम पर आधारित उनकी पेंटिंग्स मेले का प्रमुख आकर्षण बनी हुई हैं।

ज्योति बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही ड्राइंग और पेंटिंग का शौक था। खाली समय में वह पेंटिंग बनाकर अपने कमरे में सजाया करती थीं। मोहल्ले के लोगों ने जब उनकी कला देखी तो सराहना की और ऑर्डर मिलने शुरू हो गए। धीरे-धीरे उनका शौक पहचान में बदल गया।
अब गांव और आसपास के लोग अपनी पसंद के अनुसार उनसे पेंटिंग बनवाते हैं। कई लोग अपनी फोटो देकर पोर्ट्रेट बनवाते हैं, जिन्हें ज्योति केनवास पर जीवंत रूप दे देती हैं। हाल ही में उन्होंने एमएससी की पढ़ाई पूरी की है और नाडोल में राजस्थान ग्रामीण बैंक में बैंक सखी के रूप में भी कार्यरत हैं। पढ़ाई और नौकरी के साथ वह अपने हुनर को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।
ज्योति केनवास बोर्ड पर ऑयल पेंट से पेंटिंग तैयार करती हैं। वह मुख्य रूप से 8×10 इंच और 12×14 इंच साइज में पेंटिंग बनाती हैं, जिनकी कीमत 150 रुपए से लेकर 600 रुपए तक है।
अब ज्योति अपने काम को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक ले जाने की तैयारी में हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग उनकी कला से जुड़ सकें। वह बताती हैं कि उनके पिता कृष्णगोपाल सिंह ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। परिवार के सहयोग से ही वह अपने शौक को आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़ रही हैं।

ज्योति कंवर की यह प्रेरक कहानी साबित करती है कि लगन और मेहनत के दम पर शौक भी पहचान और आय का मजबूत माध्यम बन सकता है।


