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1971 के युद्ध की भव्य कहानी लेकर आई ‘बॉर्डर 2’, देशभक्ति और बलिदान का दमदार सिनेमाई सफर।

1971 के भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म बॉर्डर 2 सिर्फ एक वॉर फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सेनाओं के साहस, बलिदान और टीमवर्क की प्रेरक कहानी है। यह फिल्म 1997 में आई सुपरहिट बॉर्डर की विरासत को आगे बढ़ाते हुए कहानी का स्केल और दायरा दोनों बढ़ाती है। इस बार जंग सिर्फ लोंगेवाला तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जमीन, हवा और समुद्र—तीनों मोर्चों पर लड़ी गई लड़ाई को दिखाया गया है।

कई मोर्चों पर चलती कहानी..

फिल्म की कहानी एक साथ कई इलाकों में तैनात भारतीय सैनिकों के इर्द-गिर्द घूमती है। अलग-अलग हालात, अलग-अलग चुनौतियां, लेकिन लक्ष्य एक—देश की रक्षा। फिल्म यह दर्शाती है कि पाकिस्तान ने किस तरह कई दिशाओं से हमला करने की कोशिश की और भारतीय सेनाओं ने रणनीति, सूझबूझ और हिम्मत से हर कोशिश को नाकाम कर दिया।

कहानी में सिर्फ गोलियों और धमाकों का शोर नहीं, बल्कि सैनिकों के भीतर चल रहे साहस, भरोसे और जिम्मेदारी का भाव भी गहराई से दिखाया गया है। कुछ दृश्य लंबे जरूर हैं, लेकिन वे इमोशनल कनेक्शन को मजबूत बनाते हैं और दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं।

एक्टिंग बनी सबसे बड़ी ताकत…

सनी देओल फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरते हैं। उनकी दमदार डायलॉग डिलीवरी और आक्रामक अंदाज दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देता है। आंखों में दिखता जुनून और देशभक्ति का जोश फिल्म को ऊंचाई देता है।
दिलजीत दोसांझ अपने किरदार में गंभीरता और हल्के हास्य का संतुलन बनाए रखते हैं, जिससे युद्ध की कठोरता के बीच मानवीय पहलू सामने आता है।

वरुण धवन सधे हुए और भावनात्मक अंदाज में नजर आते हैं, जबकि अहान शेट्टी भले ही छोटे रोल में हों, लेकिन अपनी मौजूदगी दर्ज करा जाते हैं।

डायरेक्शन, सिनेमैटोग्राफी और संगीत…

अनुराग सिंह का निर्देशन संतुलित और प्रभावी है। उन्होंने इमोशन और एक्शन के बीच सही तालमेल बैठाया है। सिनेमैटोग्राफी ग्रैंड है, जिसमें वॉर जोन, धमाके और सैनिकों की मूवमेंट को बेहद असरदार तरीके से दिखाया गया है। साउंड डिजाइन हर सीन के रोमांच को दोगुना कर देता है।

संगीत भावनाओं का साथ देता है। हालांकि पहली बॉर्डर के यादगार गानों जैसी गहरी छाप बनाना मुश्किल था, फिर भी नए गाने कहानी के मूड के अनुसार फिट बैठते हैं।

पहली बॉर्डर से तुलना…

जहां बॉर्डर सिर्फ लोंगेवाला की जंग पर केंद्रित थी, वहीं बॉर्डर 2 तीनों मोर्चों पर लड़ी गई लड़ाई को दिखाती है। स्केल बड़ा है, तकनीक आधुनिक है और एक्शन पहले से ज्यादा शार्प और इंटेंस नजर आता है। म्यूजिक भले ही पहली फिल्म जितना आइकॉनिक न हो, लेकिन आज के समय के हिसाब से प्रभावी है।

बॉर्डर 2 एक बड़े पैमाने की, इमोशनल और दमदार वॉर फिल्म है। कुछ जगह लंबाई महसूस होती है और महिला किरदार सीमित हैं, लेकिन मजबूत एक्टिंग, सॉलिड डायरेक्शन और पावरफुल कहानी इसे देखने लायक बनाती है। फिल्म खत्म होने के बाद दर्शकों के दिल में गर्व, सम्मान और भारतीय सैनिकों के लिए गहरा रिस्पेक्ट छोड़ जाती है।

Akram Khan

Written by Akram Khan

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