पाली के औद्योगिक क्षेत्र प्रथम और द्वितीय चरण में पिछले एक महीने से 48 टेक्सटाइल इकाइयां बंद पड़ी हैं। इसका असर इतना गहरा है कि पूरे इलाके की आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं।
फैक्ट्रियों में काम करने वाले करीब 10 हजार श्रमिकों के सामने रोजगार और रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
श्रमिकों के चेहरों पर चिंता साफ देखी जा सकती है। कई लोग अपने परिवार के पालन-पोषण को लेकर परेशान हैं और मजबूरी में दूसरे काम की तलाश में भटक रहे हैं। वहीं कुछ उद्यमी अस्थायी तौर पर अन्य इकाइयों से कपड़ा प्रोसेस करवा रहे हैं, लेकिन सीमित क्षमता के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर बाजार में सप्लाई और व्यापार पर भी पड़ रहा है। पूरे औद्योगिक क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है।
उम्मीद की किरण: पाइपलाइन और ट्रीटमेंट प्लांट योजना…
करीब एक सप्ताह पहले जयपुर में रीको की बैठक के बाद उद्यमियों को थोड़ी राहत की उम्मीद जगी।
बैठक में ट्रीटमेंट प्लांट संख्या 7 बनाने पर सहमति बनी, वहीं अब ट्रीटमेंट प्लांट संख्या 6 (ZLD) तक पाइपलाइन बिछाने के लिए सरकार से 13.50 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है।
इस योजना के तहत लगभग 15 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे फैक्ट्रियों का गंदा पानी जेडएलडी प्लांट तक पहुंचाकर उसका उपचार किया जा सकेगा।
2017 से अटकी योजना, अब फिर उम्मीद…
उद्यमियों ने इस पाइपलाइन के लिए वर्ष 2017 में ही प्रयास शुरू कर दिए थे और सीईटीपी के लिए 1.5 करोड़ रुपए भी जमा करवाए थे, लेकिन योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर इस प्रोजेक्ट से उद्योगों के पुनः चालू होने की उम्मीद बंधी है।
कंसेंट रद्द, बढ़ेगा आर्थिक बोझ…
औद्योगिक क्षेत्र की सभी इकाइयों की कंसेंट निरस्त कर दी गई है। अब उद्यमी पुरानी कंसेंट को दोबारा जारी करवाने की कोशिश में हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो नई कंसेंट लेने के लिए प्रति इकाई करीब 3 लाख रुपए खर्च करने होंगे, जो उद्यमियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनेगा।
पाइपलाइन का प्रस्ताव तैयार, सरकार की मंजूरी बाकी...
पाइपलाइन को औद्योगिक क्षेत्र के नालों के सहारे निकालने की योजना है, जो रेलवे ट्रैक पार करते हुए आरटीओ कार्यालय और पुनायता गांव के पास से होकर प्लांट तक पहुंचेगी। फोरलेन के पास मौजूदा पाइपलाइन से इसे जोड़ा जाएगा।
उद्योग विभाग इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है और अब यह योजना सरकार के पास लंबित है।


