राजस्थान के पाली जिले के राजकीय महाविद्यालय जैतारण में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को प्रेरित कर दिया। यहां निमाज निवासी ममता कुमावत ने अपनी शादी के फेरे लेने के तुरंत बाद सीधे परीक्षा केंद्र पहुंचकर शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का अनोखा उदाहरण पेश किया।
मंगलवार सुबह सवा ग्यारह बजे ममता का विवाह पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। लेकिन जैसे ही फेरे पूरे हुए, ममता ने अपने दूल्हे और दोनों परिवारों के सामने एम.ए. राजनीति विज्ञान तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा देने की इच्छा जताई। खास बात यह रही कि परिवार और ससुराल पक्ष ने भी उनकी इस इच्छा का पूरा सम्मान किया और तुरंत सहमति दे दी।
इसके बाद ममता दुल्हन के जोड़े में ही सीधे राजकीय महाविद्यालय जैतारण पहुंचीं, जहां प्राचार्य राकेश वर्मा ने उनका स्वागत किया। परीक्षा केंद्र पर दुल्हन के रूप में पहुंची ममता को देखकर छात्र-छात्राएं और स्टाफ हैरान रह गए, लेकिन जल्द ही यह हैरानी गर्व में बदल गई।
ममता ने बताया कि उनकी विदाई की रस्में परीक्षा खत्म होने के बाद ही पूरी की जाएंगी। इस दौरान परिवार का पूरा सहयोग उनके साथ रहा, जिससे वे बिना किसी रुकावट के अपने भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकीं।
ममता की यह कहानी न केवल शिक्षा के महत्व को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी परिस्थिति राह नहीं रोक सकती।


