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हारकर भी जीत लिया दिल: पाली उपमहापौर चुनाव के बाद दिखा भाईचारे और इंसानियत का अनोखा रूप

वरिष्ठ अध्यापक और लेखक अकरम खान मुगल की कलम से।

पाली। पाली की राजनीति में हाल ही में संपन्न हुए उपमहापौर चुनाव के बाद एक बेहद खूबसूरत और मिसाली तस्वीर देखने को मिली, जिसने लोकतंत्र की गरिमा को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। भाजपा के उपमहापौर प्रत्याशी विक्रमपाल सिंह ने हार-जीत से परे हटकर अपने निर्दलीय प्रतिद्वंद्वी को मुस्कुराते हुए दिल से जीत की मुबारकबाद दी।

चुनावों में अक्सर हार-जीत के बाद राजनीतिक कड़वाहट देखने को मिलती है, लेकिन विक्रमपाल सिंह के इस अपनत्व और सादगी भरे रवैये ने शहरवासियों का दिल जीत लिया। उनकी इस पहल ने यह साबित कर दिया कि चुनाव में रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन शहर के प्रति प्रेम और आपसी भाईचारा हमेशा सर्वोपरि रहना चाहिए।

“रास्ते अलग थे, मगर मंजिल हमारा पाली था,

मुकाबला चुनाव का था, दिल में भाईचारा निराला था।

जीत-हार को छोड़कर गले जब मिले दोनों यार,

तब लोकतंत्र ने पहना मोहब्बत का सबसे खूबसूरत हार।।

विकास के लिए ‘एक और एक ग्यारह’ का भाव जरूरी

चुनावी मुकाबला समाप्त होने के बाद अब मुख्य जिम्मेदारी पाली शहर के सर्वांगीण विकास की है। चाहे कोई जनप्रतिनिधि भाजपा, कांग्रेस से चुनकर आया हो या निर्दलीय, जनता की जरूरतें और अपेक्षाएं एक समान हैं—बेहतर सड़कें, स्वच्छ पेयजल, सुदृढ़ सफाई व्यवस्था और रोशनी।

‘स्वच्छ पाली, स्वस्थ पाली और विकसित पाली’ का सपना तभी पूरा हो सकता है, जब सभी प्रतिनिधि आपसी मतभेदों को भुलाकर ‘एक और एक ग्यारह’ की भावना के साथ कार्य करें।

राजनीति में हार और जीत आती-जाती रहती है, लेकिन इंसानियत और आपसी सौहार्द ही वह असली पूंजी है जो समाज को जोड़े रखती है। विक्रमपाल सिंह की इस उदारता से उम्मीद जगी है कि आने वाले पांच वर्षों में पाली के सभी जनप्रतिनिधि मिलकर शहर की प्रगति और जनता के विश्वास को मजबूत करने का कार्य करेंगे।

असली जीत केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता का विश्वास और दिल जीतना है।

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Written by Rj22 news

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