पाली। संसद में जनहित से जुड़े सवाल उठाने के मामले में पाली लोकसभा क्षेत्र से सांसद पीपी चौधरी ने प्रदेशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने लोकसभा में सर्वाधिक 26 प्रश्न पूछे। इसके साथ ही उनकी सदन में उपस्थिति 100 प्रतिशत रही तथा उन्होंने चार महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस में भाग लिया, जो उनकी सक्रिय और प्रभावी संसदीय भूमिका को दर्शाता है।
लोकसभा में कुल 3,449 प्रश्नों में से राजस्थान के सांसदों द्वारा 327 प्रश्न पूछे गए। इनमें पाली सांसद पीपी चौधरी 26 प्रश्नों के साथ शीर्ष पर रहे। वहीं भीलवाड़ा के सांसद दामोदर अग्रवाल ने 25 प्रश्न पूछकर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि राजसमंद की सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ 23 प्रश्नों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
बहस में हनुमान बेनीवाल रहे आगे..
संसद में बहस के दौरान मुद्दे उठाने के मामले में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल सबसे आगे रहे। उन्होंने बिल पर बहस, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य माध्यमों से 12 बार सदन में मुद्दे उठाए। बांसवाड़ा-डूंगरपुर से भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने 9 बार मुद्दे उठाकर दूसरा स्थान प्राप्त किया।
कौन हैं सांसद पीपी चौधरी…
पाली सांसद पीपी चौधरी एक वरिष्ठ अधिवक्ता और अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं और इससे पूर्व कॉर्पोरेट मामलों, कानून एवं न्याय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक 2022 तथा व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक 2019 पर गठित संयुक्त समिति के अध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं।
पीपी चौधरी का जन्म.. राजस्थान के जोधपुर जिले के भावी गांव में एक किसान परिवार में हुआ। वे प्रभु राम चौधरी और धाकु देवी के पुत्र हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव के साथ उनकी प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार आरएसएस शाखा से जुड़े रहे। उन्होंने बी.एससी. और एल.एल.बी. की शिक्षा जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर से प्राप्त की और वर्ष 1978 से जोधपुर उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की। उनका विवाह वीणा पाणि चौधरी से हुआ तथा उनके दो संतान हैं।
लगातार तीन बार सांसद.. सांसद रत्न से भी सम्मानित
पीपी चौधरी ने वर्ष 2014 में पाली लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतते हुए चार लाख से अधिक मतों से विजय प्राप्त की। वर्ष 2019 में उन्होंने पांच लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज की, जबकि 2024 में 2.5 लाख मतों के अंतर से पुनः सांसद बने। लोकसभा में उत्कृष्ट संसदीय कार्य के लिए उन्हें 2015 और 2016 में लगातार दो वर्षों तक ‘सांसद रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।
संसद में उनकी सक्रियता, प्रश्न पूछने की संख्या और जनहित के मुद्दों पर प्रभावी भूमिका ने उन्हें प्रदेश के अग्रणी सांसदों की पंक्ति में खड़ा किया है।


