in

इंसानियत को खत्म करने वाली खबरों से रू-ब-रू होती दुनियां ओर भाईचारे का पैग़ाम देते सभी धर्म के ग्रंथों का संदेश नफ़रत छोड़ो दिल जोड़ों

पाली/ सोशल स्टोरी में आज हम बात करेंगे धार्मिक उन्माद ओर बिखरते

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई भाईचारा ओर सांझा संस्कृति ओर हमारे संस्कार की आज पुरी दुनियां में जरुरत है हमारे लोक संत सूफी पीर फकीरों ओर महान् क्रान्तिकारीयों के द्वारा की गई जनहित की लोक वाणी ओर उपदेशों को अपने जीवन के संस्कार में शामिल करने कि ओर उनके बताए जन कल्याण के रास्तों पर चलकर मानव जीवन को सफल बनाने की। महान् संत कबीर दास जी की वाणी**देख कबीरा दंग रह गया मिला ना कोई मीत-मंदिर मस्जिद के चक्कर में खत्म हो गई प्रीत** मानव जाति के कल्याण की खबरों के बीच बीच में जब बांग्लादेश से किसी हिंदू भाई दीपूदास के हिंसक भीड़ द्वारा धर्म की आड़ में जब पीट पीट कर मारने ओर जिंदा जला देने की खबर साया होती है

या भारत के किसी हिस्से में मांबलिचीग में किसी मुसलमान के मारे जानें की खबर हों या फिर क्रिसमस पर ईसाई गिरजाघर में तोड़ फोड़ ओर मारपीट की खबर आती है तो पुरा विश्व ऐसी हिंसक खबरों को सुनकर दहल जाता है।कि आज के युग में भी इंसान इंसान ना होकर दंरिदा ओर जानवर क्यों बना हुआ है। किया किसी भी धर्म के धर्म गुरुओं ने इस तरह इंसानों को मारने ओर इंसानियत को मिटाने का प्रर्वचन/संदेश दिया है।तो हमें पता चलता है हमारे पुराने ग्रंथों ओर बाइबिल कुरान ओर रामायण में कही भी ऐसे कृत्य करने का ऐलान नही किया गया है।हर धार्मिक ग्रंथों में इंसान की भलाई करने ओर एक दुसरे की मदद करने ओर मानव कल्याण के कामों को करने का संदेश/पैग़ाम दिया गया है।फिर क्यों हम धर्म की आड़ लेकर हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई एक दुसरे की जान लेने पर उतारू है।ओर अपने अपने धार्मिक ग्रंथों का अपमान कर रहे हैं। हम सभी मानव जाति के लिए यह विचार करने का प्रश्न है।हम हमारी सांझा संस्कृति ओर भाईचारे की मजबूत नींव को स्वंय खोखला कर रहे हैं।ओर एक दूसरे के बीच नफरत के बीज बो रहे हैं।जो हमारी आगे आने वाली नस्लों/पीढीयों के लिए भस्मासुर की तरह मुंह खोलें खड़ी होगी।अब भी वक्त है हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां सिर्फ और सिर्फ मोहब्बत हो प्रैम हो खुशियां हो चारों तरफ उजाला ही उजाला हो ओर अंधकार का नाश हो। चारों तरफ मासूम बच्चों की चीख की जगह किलकारीयां गुंजे ओर ओर चिडीयों की चहचहाहट गुंजें।ओर कही से आरती की आवाज़ तो कही से अजा़न गुंजें कही अरदास की वाणी गुंजें तभी यह दुनियां ओर समाज सफल होगा। वरना नफ़रत तो हमेशा नाश ही लाती है। नफ़रत छोड़ो दिल जोड़ों यही सच्चाई है ओर इसी सच्चाई को अपनाना होगा। *RJ22 News Pali चीफ़ एडीटर सैय्यद फैयाज बुखारी****-

Fayaj Bukhari

Written by Fayaj Bukhari

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सास ससुर ओर पत्नी पर तलवार से किया जानलेवा हमला क्षेत्र में फैली दहशत पुलिस कर रही आरोपी की तलाश

अरावली के सम्मान में कांग्रेस उतरी मैदान में रैली आयोजित कर जताया कड़ा विरोध