पाली | 2 फरवरी 2026 केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के मूल स्वरूप में किए गए बदलावों के विरोध में आज पाली जिला कांग्रेस कमेटी ने हुंकार भरी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जिला मुख्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन किया गया। इसके पश्चात, जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह निम्बाड़ा के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मनरेगा को पुराने स्वरूप में बहाल करने की मांग की।

‘मनरेगा बचाओ संग्राम’: गरीबों के हक की लड़ाई
धरना स्थल पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह निम्बाड़ा ने कहा, “केंद्र की भाजपा सरकार ने मनरेगा का नाम और स्वरूप बदलकर इसे कमजोर कर दिया है, जिससे गरीबों के काम की वैधानिक गारंटी समाप्त हो गई है। यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि डॉ. मनमोहन सिंह सरकार द्वारा दिया गया आजीविका का अधिकार है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने देगी।”
पूर्व विधायक खुशवीर सिंह जोजावर ने इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह करोड़ों परिवारों के लिए सम्मानजनक आजीविका का आधार है। वहीं, पूर्व जिलाध्यक्ष अजीज दर्द और पूर्व प्रधान शोभा सोलंकी ने सरकार के नए प्रस्तावों को गरीब-मजदूर विरोधी करार दिया।

कांग्रेस की मुख्य 4 मांगें:
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
* काम, मजदूरी और जवाबदेही की पूर्ण गारंटी दी जाए।
* मनरेगा में हाल ही में किए गए सभी बदलावों को तत्काल वापस लिया जाए।
* काम के संवैधानिक अधिकार को पूर्णतः बहाल किया जाए।
* श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 400 रुपए प्रतिदिन निर्धारित हो।
दिग्गज नेताओं की रही मौजूदगी
प्रदर्शन के दौरान जोगाराम सोलंकी, मोहन हटेला, नीलम बिड़ला, पीराराम पटेल, नेहपाल सिंह जोधा, पाबुसिंह राणावत सहित भारी संख्या में ब्लॉक अध्यक्ष, पूर्व जनप्रतिनिधि और अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। शहर ब्लॉक अध्यक्ष हकीम भाई ने अंत में सभी का आभार व्यक्त किया।


