हर वर्ष 11 फरवरी को मनाया जाने वाला यूनानी दिवस महान यूनानी चिकित्सक, समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी हकीम अजमल खान की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उनका जन्म 11 फरवरी 1868 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने यूनानी चिकित्सा पद्धति के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया और इसे एक संगठित पहचान दिलाई।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त यह दिवस वर्ष 2017 से वैश्विक स्तर पर मनाया जा रहा है। इस वर्ष 2026 में भी 11 फरवरी को यूनानी दिवस मनाया गया, जिसके तहत देशभर में जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार और चिकित्सा संवाद आयोजित किए जा रहे हैं।
इसी क्रम में 14 व 15 फरवरी को मुंबई में राष्ट्रीय सम्मेलन “Innovation and Evidence in Unani Practice” का आयोजन किया जा रहा है, जिसे CCRUM (Central Council for Research in Unani Medicine) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में यूनानी चिकित्सा में नवाचार, शोध और प्रमाण-आधारित उपचार पद्धतियों पर विशेष चर्चा होगी।
यूनानी दिवस के अवसर पर क्षेत्र के प्रबुद्धजनों ने शुभकामनाएं देते हुए इस चिकित्सा पद्धति के महत्व को रेखांकित किया।
इस मौके पर डॉ. मोईनुद्दीन, डॉ. दानिश, डॉ. असमा मेहर, डॉ. यारू खान, डॉ. मोईनुद्दीन मेहर, डॉ. फारूक, ठेकेदार मोहम्मद आसिफ, इंजीनियर मो. हसीर इरशाद सिसोदिया, शाहरुख खान टांक एवं नासिर सिसोदिया ने यूनानी दिवस की बधाई देते हुए कहा कि यूनानी चिकित्सा आज भी प्राकृतिक और सुरक्षित उपचार पद्धति के रूप में समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि हकीम अजमल खान की विरासत को आगे बढ़ाते हुए आज जरूरत है कि युवा पीढ़ी यूनानी चिकित्सा के प्रति जागरूक हो और इसे आधुनिक शोध से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए।


