भक्ति, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का अनूठा संगम; दो महीने तक मंदिर में भजन-कीर्तन, अमावस्या पर गायों को लापसी और समापन पर निकलता है भव्य धार्मिक जुलूस।
गुडाबीजा। अरावली की सुरम्य वादियों में बसे गुडाबीजा गांव में सावन और भाद्रपद के पवित्र दो महीने आते ही माहौल पूरी तरह शिवमय हो जाता है। गांव के महादेव मंदिर में दिन-रात भक्ति की गूंज सुनाई देती है। करीब 25 वर्षों से चली आ रही भजन-कीर्तन की परंपरा आज भी ग्रामीणों की सामूहिक सहभागिता और श्रद्धा के साथ निरंतर जारी है।
सावन-भाद्रपद के दौरान दिन में महिलाएं मंदिर में एकत्र होकर भजन-कीर्तन करती हैं, वहीं रात में ग्रामीण सामूहिक रूप से भक्ति गीतों और भजनों का आयोजन करते हैं। महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर सहित पूरा गांव भक्तिमय नजर आता है।
गांव में प्रत्येक अमावस्या पर गायों को श्रद्धापूर्वक लापसी खिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। ग्रामीण इसे सेवा, पुण्य और धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं।
दो माह तक चलने वाले धार्मिक आयोजनों के समापन पर गांव में भव्य धार्मिक जुलूस निकाला जाता है। इसमें देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां सजाई जाती हैं। विशेष रूप से संजीवनी झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहती है। जुलूस में ग्रामीणों के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं और भक्ति गीतों व जयकारों के बीच धार्मिक उल्लास में शामिल होते हैं।
समापन अवसर पर महादेव मंदिर में खीर का प्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, सेवा भावना और सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम भी है।
बुजुर्गों से मिली इस परंपरा को नई पीढ़ी भी उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है। यही कारण है कि 25 वर्षों से सावन-भाद्रपद में गुडाबीजा महादेव के जयकारों से गूंजता आ रहा है और यह आयोजन गांव की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।


