सोजत/पाली। ज्योतिष न केवल सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है, बल्कि यह वैज्ञानिक और तार्किक आधारों पर भी टिका हुआ है। सटीक गणितीय गणनाओं, जन्म समय, स्थान, अक्षांश और देशांतर की सूक्ष्म स्थिति के आधार पर की गई भविष्यवाणियां सार्थक सिद्ध होती हैं। ये विचार भारत के सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य प्रो. धर्मेंद्र शर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार चेतन व्यास के साथ विशेष बातचीत में व्यक्त किए।
प्रो. शर्मा ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र एक सुव्यवस्थित ज्ञान परंपरा है, जिसे समझने के लिए गणित, खगोल और आध्यात्मिक दृष्टि—तीनों का समन्वय आवश्यक है। उनका मानना है कि आधुनिक युग में भी ज्योतिष की प्रासंगिकता बनी हुई है, बशर्ते इसे तर्क और शोध की दृष्टि से अपनाया जाए।
उल्लेखनीय है कि प्रो. धर्मेंद्र शर्मा ज्योतिष, हस्तरेखा शास्त्र और वास्तुशास्त्र के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वे अपने गहन ज्ञान और विशेषज्ञता के लिए पहचाने जाते हैं। कम उम्र से ही उनकी रुचि आध्यात्मिकता और धार्मिक उत्थान की ओर रही, और उन्होंने अपना जीवन इन प्राचीन विद्याओं के अध्ययन व प्रसार को समर्पित कर दिया।
उनका जीवन सादगी, प्रामाणिकता और सेवा भाव की भावना से ओतप्रोत रहा है। ऐसे दौर में, जब दिखावा और आडंबर बढ़ रहा है, प्रो. शर्मा अपनी सरल कार्यशैली और विद्वता के कारण अलग पहचान रखते हैं।
मीडिया क्षेत्र में भी उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति रही है। उन्होंने ज़ी न्यूज़, पी7, साधना, कात्यायनी और ईश्वर टीवी जैसे प्रमुख चैनलों पर सफलतापूर्वक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनके माध्यम से भारतीय ज्योतिष का ज्ञान व्यापक दर्शकों तक पहुंचा। इन कार्यक्रमों ने उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन के क्षेत्र में एक विश्वसनीय हस्ती के रूप में स्थापित किया।
इसके अतिरिक्त, प्रो. शर्मा ने देशभर में अनेक निशुल्क ज्योतिष एवं आध्यात्मिक शिविर आयोजित किए हैं। इन शिविरों का उद्देश्य लोगों को ईश्वर, आध्यात्मिकता और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा है। उनके प्रयासों से अनेक लोगों को मार्गदर्शन मिला और आध्यात्मिक चेतना को बल मिला।
प्रो. शर्मा का मानना है कि ज्योतिष का सही उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए। उनका दृष्टिकोण वैज्ञानिक, नवीन और उपचारात्मक है, जो व्यक्ति के समग्र विकास और जीवन संतुलन पर केंद्रित है।

