हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई विलेन ऐसे रहे हैं, जिन्होंने अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। 70 के दशक में अमजद खान ने ‘शोले’ के गब्बर सिंह के रूप में खलनायकी की जो परिभाषा तय की, उसे कोई धूमिल नहीं कर सका। लेकिन 1998 में आई राजकुमार संतोषी की मल्टीस्टारर फिल्म “चाइना गेट” ने एक नया खलनायक दिया – जगीरा, जिसे निभाया था मुकेश तिवारी ने।

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फिल्म की विशाल स्टार कास्ट
यह फिल्म 27 नवंबर 1998 को रिलीज हुई थी।
इसमें एक साथ 15 बड़े कलाकारों की टोली नजर आई –
अमरीश पुरी, नसीरुद्दीन शाह, डैनी डेन्जोंगपा, ओम पुरी, कुलभूषण खरबंदा, परेश रावल, अनुपम खेर, जगदीप, टीनू आनंद, अंजन श्रीवास्तव, समीर सोनी, विजू खोटे, ममता कुलकर्णी और उर्मिला मातोंडकर।
लेकिन पूरी फिल्म में जिस किरदार ने सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ा, वह था जगीरा, जो बाकी 14 हीरो पर भारी पड़ गया।

मुकेश तिवारी – जगीरा बनने की कहानी

जब मुकेश तिवारी को इस रोल के लिए फोन आया, तो उनके पास मुंबई आने के पैसे तक नहीं थे। एक दोस्त ने मदद की और वह मुंबई पहुंचे।
किरदार की डिमांड थी कि वह गंदा, जंगली और खौफनाक डाकू दिखे। इसके लिए मुकेश ने लगभग 50 दिन तक नहाया नहीं।
बदबू से बचने के लिए परफ्यूम का सहारा लेना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उनके पास चील-कौवे मंडराने लगे।
यहां तक कि एक सीन में घोड़ा उन्हें देखकर बेकाबू हो गया।
डायलॉग जिसने खलनायकी को अमर कर दिया
फिल्म में जगीरा का एक डायलॉग आज भी याद किया जाता है –
“मेरे मन को भाया, मैं कुत्ता काट के खाया।”
इस एक लाइन ने मुकेश तिवारी को रातोंरात सिनेमा के सबसे खतरनाक विलेन की लिस्ट में ला खड़ा किया।
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बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और यादगार गाना
फिल्म लगभग 9.25 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी।
इसने करीब 22.30 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया।
फिल्म का गाना “छम्मा-छम्मा” आज भी सुपरहिट है और इसे बाद में हॉलीवुड फिल्म मूलिन रूज में भी इस्तेमाल किया गया।