पाली, राजस्थान – पाली शहर की ऐतिहासिक धरोहर, लाखोटिया तालाब, आजकल गंदगी और लापरवाही का शिकार बन चुका है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि तालाब में कई दिनों से जाल और कांटे जमा हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है और सैकड़ों मछलियाँ मर रही हैं। तालाब के आसपास बढ़ती झाड़ियों ने स्थिति को और गंभीर कर दिया है, जिसके कारण पहले मछलियों को आटा-चावल खिलाने आने वाले लोग अब यहाँ कदम रखने से कतराने लगे हैं।
स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, “पहले यह तालाब हमारी आस्था का केंद्र था। लोग यहाँ मछलियों को खाना खिलाने आते थे, लेकिन अब दुर्गंध और गंदगी के कारण कोई नहीं आता। हमने कई बार नगर निगम और जिला प्रशासन को शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
मत्स्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि तालाब में ऑक्सीजन की कमी और प्रदूषण मछलियों की मौत का प्रमुख कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित सफाई, झाड़ियों को हटाना और पानी की गुणवत्ता की जाँच जरूरी है। इसके बावजूद, प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय लोग अब सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए अपनी आवाज उठा रहे हैं। #LakhotiaTalab और #SavePaliLake जैसे हैशटैग के साथ X पर पोस्ट किए जा रहे हैं, जिसमें प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की माँग की जा रही है। पर्यावरण कार्यकर्ता विशाल पांडे का कहना हैं, “यह तालाब केवल मछलियों का घर नहीं, बल्कि पाली की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।”
नागरिकों ने जिला कलेक्टर और नगर निगम से तालाब की सफाई, झाड़ियों को हटाने और मछलियों को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की माँग की है। क्या प्रशासन अब इस ऐतिहासिक तालाब को बचाने के लिए जागेगा, या यह लापरवाही का शिकार बनकर अपनी पहचान खो देगा?


