पाली, 26 अगस्त 2025 – जिले में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। शहर के बीचों-बीच बहने वाली बांडी नदी उफान पर है, जिसके कारण कई इलाकों का संपर्क टूट गया है। ऐसे में, दिहाड़ी मजदूरों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। अपनी रोज की मजदूरी के लिए ये मजदूर जान जोखिम में डालकर उफनती नदी को पार करने के लिए मजबूर हैं।
जान की परवाह किए बिना, मजदूरी पहली प्राथमिकता
बांडी नदी पर बने पुल के ऊपर से पानी बह रहा है, जिससे पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। इसके बावजूद, कई मजदूर जल्दबाजी में और दूसरे सुरक्षित रास्तों की जानकारी होने के बाद भी जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वे समय पर काम पर नहीं पहुंचेंगे, तो उन्हें उस दिन की दिहाड़ी नहीं मिलेगी। यह उनकी और उनके परिवार की रोजी-रोटी का सवाल है।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
स्थानीय लोगों और मजदूरों ने प्रशासन की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बांडी नदी के खतरे को देखते हुए प्रशासन को पहले से ही अलर्ट रहना चाहिए था। नदी के किनारों पर सुरक्षा व्यवस्था, जैसे कि बैरिकेडिंग और पुलिस की तैनाती, होनी चाहिए थी ताकि लोग खतरे वाली जगह से दूर रहें। सुरक्षित रास्तों और पुलों की जानकारी भी समय पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी।
तत्काल कार्रवाई की मांग
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, यह आवश्यक है कि प्रशासन तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करे। जिला प्रशासन को चाहिए कि:
* सुरक्षा बढ़ाए: नदी के पास और पुल पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया जाए ताकि किसी भी दुर्घटना को रोका जा सके।
* सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराए: लोगों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों के बारे में जानकारी दी जाए।
* जागरूकता फैलाए: जोखिम से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए और खतरे के समय नदी पार न करने की सलाह दी जाए।
यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कोई भी नागरिक अपनी जान जोखिम में डालने पर मजबूर न हो, खासकर जब बात रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हो।


