सोजत। मारवाड़ की धरती पर पानी की किल्लत कोई नई बात नहीं है, लेकिन सोजत नगर में गहराता पेयजल संकट अब आमजन के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। शहर के कई वार्डों में सात से आठ दिन तक नलों में पानी नहीं आ रहा, वहीं कुछ क्षेत्रों में लोगों को आठ से दस दिन तक जलापूर्ति का इंतजार करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि परिवारों को घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए ₹600 तक खर्च कर निजी टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। कमजोर मानसून और लगातार गिरते भूजल स्तर ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
नगर के विभिन्न वार्डों में अनियमित जलापूर्ति के चलते लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। पीने के पानी, खाना बनाने, स्नान और अन्य घरेलू कार्यों के लिए पानी जुटाना चुनौती बन गया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए महंगे टैंकर मंगवाना आसान नहीं है। ऐसे में पानी की किल्लत ने आमजन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
इस बार मानसून कमजोर रहने से क्षेत्र में भूजल स्तर नीचे जाने की स्थिति बनी है। परंपरागत जलस्रोतों और बेरों में पानी का स्तर गिरने से संकट गहराने लगा है। इसका असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है और फसलों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। पेयजल की समस्या अब इंसानों के साथ गोवंश के लिए पानी की व्यवस्था करने की चुनौती भी खड़ी कर रही है।
पेयजल संकट के बीच सोजत के युवा उद्यमी एवं भामाशाह महेंद्र राठौड़ ने राहत पहुंचाने की पहल की है। वे अब तक करीब आधा दर्जन ट्यूबवेल खुदवा चुके हैं। उनका लक्ष्य नगर के प्रत्येक वार्ड में जरूरत के अनुसार ट्यूबवेल खुदवाकर लोगों को राहत पहुंचाना है। इस संबंध में वे जिला कलेक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी से मुलाकात कर अपनी कार्ययोजना से भी अवगत करा चुके हैं। उनका प्रयास है कि प्रशासन के मार्गदर्शन में जरूरतमंद क्षेत्रों में जल्द कार्य शुरू किया जाए।
शहरवासियों की मांग है कि जलदाय विभाग प्रभावित वार्डों में आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के साथ जरूरतमंदों तक टैंकरों से पानी पहुंचाए। साथ ही वर्षा जल संचयन, परंपरागत जलस्रोतों के संरक्षण और भूजल के विवेकपूर्ण उपयोग पर ध्यान दिया जाए, ताकि सोजत को इस गंभीर जल संकट से स्थायी राहत मिल सके।


