पाली। कहते हैं कि प्रतिभा महलों की मोहताज नहीं होती। पाली के वन्दे मातरम् सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। हाल ही में घोषित 12वीं बोर्ड के परीक्षा परिणामों में स्कूल की बेटियों ने न केवल शानदार अंक हासिल किए, बल्कि अपनी गरीबी और अभावों को अपनी सफलता के आड़े नहीं आने दिया।
मुख्य बिंदु:
खुशबू कुमावत (विज्ञान) ने 98% अंक प्राप्त कर पाली जिले का नाम रोशन किया।
सोनू चितारा ने मां के निधन के बाद भी वाणिज्य वर्ग में 97.60% अंक हासिल किए।
दिव्यांग छात्रा वृशिका ने 10वीं के मुकाबले 12वीं में 25% से ज्यादा का सुधार कर सबको चौंकाया।
नगीने जड़ने वाली मां की बेटी जीनल ने प्राप्त किए 95.40% अंक।

मैकेनिक की बेटी खुशबू ने रचा इतिहास
विज्ञान संकाय में 98% अंक प्राप्त करने वाली खुशबू कुमावत आज जिले के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। खुशबू के पिता दोपहिया वाहन के मिस्त्री हैं। तंगहाली के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी। खुशबू की इस उपलब्धि से पूरे मोहल्ले में जश्न का माहौल है।

मां को दी अंकों की श्रद्धांजलि
वाणिज्य वर्ग की छात्रा सोनू चितारा (97.60%) की कहानी कलेजा चीर देने वाली है। सोनू ने अपनी मां को खोने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। बैग सिलाई का काम करने वाले उनके पिता ने मां और बाप दोनों का फर्ज निभाया। सोनू ने अपनी इस सफलता को अपनी दिवंगत मां को समर्पित किया है।


जीनल और वृशिका: हौसलों की नई परिभाषा
बिना पिता के साये के पढ़ रही जीनल कंवर राठौड़ (95.40%) की सफलता के पीछे उनकी मां का कड़ा संघर्ष है। जीनल की मां चूड़ियों में नगीने जड़ने का मजदूरी का काम करती हैं। वहीं, दिव्यांग छात्रा वृशिका कुमावत (93.40%) ने शारीरिक बाधा को मात देते हुए सबको हैरान कर दिया। वृशिका ने 10वीं की तुलना में 12वीं में 25.40% अंकों का भारी इजाफा किया है।
विद्यालय प्रबंधन ने जताया हर्ष
छात्राओं की इस गौरवशाली उपलब्धि पर विद्यालय के संचालक राजेंद्र सिंह भाटी एवं प्रधानाचार्य सुरेन्द्र सिंह ने हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की सफलता शिक्षकों के सही मार्गदर्शन और बच्चों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। विद्यालय में मिठाइयां बांटकर और माला पहनाकर इन ‘सितारों’ का स्वागत किया गया।
“इन बेटियों की कहानियां सिर्फ मार्कशीट के नंबर नहीं हैं, बल्कि यह उन सभी विद्यार्थियों के लिए एक सबक है जो छोटी-छोटी कठिनाइयों से घबराकर हार मान लेते हैं।”
राजेंद्र सिंह भाटी संचालक
