सोजत। बहुचर्चित गंगा सिंह झूपेलाव हत्याकांड में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए 13 आरोपियों में से 5 को दोषी ठहराया है, जबकि 8 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। यह निर्णय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री दिनेश कुमार गढ़वाल ने 29 अप्रैल (बुधवार) को खुले न्यायालय में सुनाया।
अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी ने बताया कि यह मामला 17 मई 2016 का है, जब योगेंद्र सिंह पुत्र गंगा सिंह ने थाना शिवपुरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार आरोपीगण सार्वजनिक पिचके और चौक पर तारबंदी कर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। विरोध करने पर आरोपियों ने गंगा सिंह पर लाठी और लोहे के सरियों से सामूहिक हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
मजबूत साक्ष्यों पर टिका फैसला…
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 48 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 73 दस्तावेज व आर्टिकल न्यायालय में प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने इंद्र सिंह, विक्रम सिंह, अर्जुन सिंह, भेरू सिंह और दलपत सिंह को दोषी करार दिया।
आजीवन कारावास की सजा...
न्यायालय ने पांचों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 148, 323/149 एवं 304 (Part I) सहपठित धारा 149 के तहत दोषसिद्ध मानते हुए आजीवन कारावास एवं ₹50 हजार जुर्माने से दंडित किया।
8 आरोपियों को मिला संदेह का लाभ…
वहीं, साक्ष्यों के अभाव में शेष 8 आरोपियों को न्यायालय ने बरी कर दिया।
अभियोजन की प्रभावी पैरवी…
इस प्रकरण में अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष को मजबूती से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया, जिससे मामला निर्णायक मुकाम तक पहुंच सका।


