पाली से 25 किलोमीटर दूर स्थित ओम बन्ना धाम में रक्षा बंधन के अवसर पर आज आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। यहां बड़ी संख्या में बहनें ओम बन्ना की प्रतिमा और उनकी प्रसिद्ध रॉयल एनफील्ड बुलेट को राखी बांधने पहुंचीं। श्रद्धालुओं का मानना है कि ओम बन्ना प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उनकी रक्षा करते हैं, इसलिए वे उन्हें भाई के रूप में मानती हैं।

दिल्ली की आकांक्षा चौहान पिछले दो वर्षों से लगातार रक्षाबंधन पर यहां आ रही हैं। उनका कहना है कि जब तक जीवित रहेंगी, हर साल ओम बन्ना को राखी बांधने का संकल्प निभाएंगी। पाली की खुशी सिंह भी पिछले पांच साल से यहां आ रही हैं। उनका कोई भाई नहीं है, इसलिए ओम बन्ना को ही अपना भाई मानती हैं।

विदेशी पर्यटक भी इस परंपरा से प्रभावित हो रहे हैं। इटली की मोनिका ने बताया कि यह मंदिर अपने आप में अनोखा है, जहां बुलेट की भी पूजा होती है और महिलाएं इसे भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जोड़ती हैं।

ओम बन्ना की कथा
दिसंबर 1988 में पाली-रोहट मार्ग पर हुए सड़क हादसे में चोटिला गांव के ओम सिंह राठौड़ की मृत्यु हो गई थी। उनकी 350 सीसी रॉयल एनफील्ड बुलेट (नंबर 7773) को पुलिस ने थाने में रखा, लेकिन हर बार वह रहस्यमयी तरीके से हादसे वाली जगह पर लौट आती थी। इसे चमत्कार मानकर लोगों ने वहां चबूतरा बनवाया और बुलेट की पूजा शुरू की। आज यह स्थान देशभर में “बुलेट वाले बाबा” के नाम से प्रसिद्ध है और प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

रक्षा बंधन पर यहां का माहौल विशेष रूप से जीवंत और भावुक रहा, जब सैकड़ों बहनों ने अपने अदृश्य भाई ओम बन्ना को प्रेम और विश्वास की डोर से बांधा।
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर RJ22 कि रिपोटर सागरिका जैन कि श्री ओम बन्ना जी धाम से विशेष रिपोर्ट।


