पाली। राजस्थान की औद्योगिक नगरी पाली की दो बेटियों ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। सुधाकर सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं, सुहाना और नौरीन ने 12वीं कला संकाय (Arts) में उत्कृष्ट अंक प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे जिले के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई हैं।
अभावों को बनाया अपनी ताकत
शिक्षा के क्षेत्र में सफलता की यह इबारत लिखने वाली सुहाना पुत्री सिकंदर खान ने 96.20% और नौरीन पुत्री अब्दुल गफ्फार ने 96% अंक हासिल किए हैं। इन दोनों बेटियों की पृष्ठभूमि संघर्षपूर्ण रही है:

सुहाना: इनके पिता पाली की औद्योगिक इकाइयों में फोल्डिंग का कार्य करते हैं।

नौरीन: इनके पिता एल्युमिनियम सेक्शन में श्रमिक के रूप में कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।
सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद, इन बेटियों ने अपनी पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया और आज उनकी यह उपलब्धि समाज की उस सोच को आईना दिखा रही है जो बेटियों की शिक्षा को कमतर आंकती है।
सफलता का श्रेय और शुरुआती सफर
अपनी इस शानदार जीत का श्रेय दोनों छात्राओं ने अपने माता-पिता, सुधाकर स्कूल के संचालक जब्बार अहमद, प्रारंभिक शिक्षा विद्यालय ‘न्यू लाइफ स्कूल’ के संचालक अकरम खान और अपने समस्त गुरुजनों को दिया है।
गौरतलब है कि इन बेटियों की नींव न्यू लाइफ स्कूल में रखी गई थी, जहाँ के डायरेक्टर ने न केवल उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी, बल्कि उनके अभिभावकों को भी लगातार प्रेरित किया कि वे अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलवाएं। आज वही विश्वास एक बड़े सामाजिक परिवर्तन के रूप में सामने आ रहा है।
समाज के लिए एक सशक्त संदेश
सुहाना और नौरीन की यह कहानी उन रूढ़िवादी धारणाओं को चुनौती देती है जो मानती हैं कि बेटियों का भविष्य केवल घर की चारदीवारी तक सीमित है। उनकी सफलता यह स्पष्ट संदेश देती है कि:
दृढ़ इच्छाशक्ति: गरीबी कभी भी शिक्षा की राह में रोड़ा नहीं बन सकती।
समान अवसर: यदि बेटियों को बराबरी का हक और पंख दिए जाएं, तो वे आसमान छू सकती हैं।
शिक्षा का महत्व: एक शिक्षित बेटी न केवल एक परिवार, बल्कि पूरे समाज को सशक्त बनाती है।
प्रेरणा का दीपक
इन दोनों बेटियों की उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेगी। यह साबित हो चुका है कि हालात चाहे कितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, यदि इरादे बुलंद हों तो सफलता निश्चित है। आज पूरा पाली शहर इन बेटियों की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।


