पाली। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में हुए भीषण अग्निकांड में 8 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद प्रदेशभर के सरकारी हॉस्पिटलों में फायर फाइटिंग सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पाली जिले का सबसे बड़ा बांगड़ हॉस्पिटल भी इससे अछूता नहीं है। यहां भी आग से निपटने के लिए फायर फाइटिंग सिस्टम तो लगाया गया है, लेकिन उसकी हालत बेहद खराब बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, हॉस्पिटल प्रशासन ने कई साल पहले फायर फाइटिंग सिस्टम लगाया था, लेकिन स्थापना के बाद से अब तक न तो उसकी नियमित जांच हुई और न ही कोई मॉक ड्रिल करवाई गई। कई जगहों पर पाइप गायब हो चुके हैं, तो कई जगह पानी के छिड़काव करने वाले उपकरण खराब पड़े हैं। वार्ड और गलियारों में लगाए गए ABC सिलेंडर भी ज्यादातर पुराने हो चुके हैं।
23 वार्ड, 530 बेड, हर समय करीब 1000 लोग मौजूद
बांगड़ हॉस्पिटल में वर्तमान में 23 वार्ड हैं, जिनमें करीब 530 बेड लगे हैं। हर समय हॉस्पिटल परिसर में मरीज, उनके परिजन और स्टाफ मिलाकर लगभग एक हजार लोग रहते हैं। अधिकांश वार्डों में एयर कंडीशनर (AC) लगे हुए हैं। ऐसे में किसी भी शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी से आग लगने की स्थिति में बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है।
प्रबंधन का दावा—80 प्रतिशत सिस्टम ठीक, बाकी दुरुस्त करवाया जाएगा
बांगड़ हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. कैलाश परिहार ने बताया कि हॉस्पिटल का फायर फाइटिंग सिस्टम लगभग 80 प्रतिशत तक सही स्थिति में है। करीब 20 प्रतिशत हिस्से में कमी है, जिसके सुधार के लिए नगर निगम को पत्र लिखा गया है। जल्द ही सभी खामियों को दुरुस्त करवाया जाएगा।
लापरवाही बनी खतरे की वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि आगजनी जैसी आपदाओं से निपटने के लिए लगाए गए सिस्टम का नियमित निरीक्षण और मॉक ड्रिल बेहद जरूरी होती है। लेकिन वर्षों से बांगड़ हॉस्पिटल में ऐसा नहीं किया गया, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
SMS हॉस्पिटल की घटना के बाद अब बांगड़ हॉस्पिटल में भी फायर सेफ्टी को लेकर सजगता और त्वरित सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।


