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निकाय–पंचायतीराज चुनावों में मिल सकती है बड़ी राहत,दो से ज्यादा संतान वालों पर लगी रोक हटाने पर सरकार गंभीर, जल्द बदल सकता है 29 साल पुराना नियम

राजस्थान में निकाय और पंचायतीराज चुनावों से पहले राज्य सरकार एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक फैसले की तैयारी में दिख रही है। दो से ज्यादा संतान वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने वाले 27 नवंबर 1995 के नियम को बदलने पर उच्च स्तर पर गहन मंथन शुरू हो चुका है। संकेत साफ हैं कि आने वाले दिनों में हजारों जनप्रतिनिधियों को बड़ी राहत मिल सकती है।

 क्या बदल सकता है नियम?

सूत्रों के अनुसार, सरकार दो संतान नियम को हटाने या उसमें राहत देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

फिलहाल नियम यह है कि 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरा बच्चा होने पर कोई भी व्यक्ति पंचायत या निकाय चुनाव नहीं लड़ सकता।

1995 से पहले पैदा हुए बच्चे इस पाबंदी में शामिल नहीं हैं।

लेकिन अब स्थिति बदल सकती है। मानवीय आधार, सामाजिक बदलाव, तथा सरकारी कर्मचारियों को तीन संतान की दी गई छूट को देखते हुए सरकार समान अधिकार देने की दिशा में बढ़ रही है।

सरकार क्या सोच रही है?

राज्य सरकार ने पंचायतीराज और स्वायत्त शासन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। नियम में बदलाव के राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों का भी आकलन किया जा रहा है।

पंचायतीराज मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट कहा—

भेदभाव नहीं होना चाहिए।”

“जब सरकारी कर्मचारियों को तीन संतान की छूट है, तो जनप्रतिनिधियों को भी समान अधिकार मिलने चाहिए।”

उन्होंने बताया कि इस मामले में मुख्यमंत्री स्तर पर चर्चा हो चुकी है, और सभी पक्षों, विशेषज्ञों और संगठनों की राय लेने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।

 क्यों उठ रही है नियम बदलने की मांग?

कई वर्षों से विभिन्न जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, ग्रामीण निकायों के नेता और पंचायत प्रतिनिधि इस नियम को हटाने की मांग करते आए हैं।

मांग के प्रमुख कारण—

बदली हुई सामाजिक परिस्थितियाँ

परिवार नियोजन के प्रति बढ़ी जागरूकता

बड़े परिवारों के कारण उम्मीदवारों का वंचित रह जाना

राजनीतिक मैदान में योग्य लोगों का रास्ता बंद होना

चुनाव से पहले बड़ा फैसला संभव..

सूत्रों का दावा है कि निकाय और पंचायत चुनावों से पहले सरकार इस नियम में संशोधन या पूरी तरह हटाने का बड़ा निर्णय ले सकती है।

अगर ऐसा हुआ तो—

हजारों संभावित उम्मीदवारों को मिलेगी राहत

कई क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल जाएंगे

ग्राम पंचायत से लेकर नगर परिषद तक नए चेहरे मैदान में उतर सकेंगे

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

क्योंकि यह नियम लगभग 29 साल से लागू है और इससे हर चुनाव में बड़ी संख्या में लोगों का राजनीतिक मार्ग अवरुद्ध होता रहा है।

साथ ही यह मुद्दा राजनीति, समाज, कानून और सामाजिक न्याय—सभी से जुड़ा है।

राजस्थान सरकार अब पूरी तरह सक्रिय है और संकेत मिल रहे हैं कि दो संतान नियम इतिहास बनने की ओर बढ़ रहा है।

अगर सरकार अगल-बगल में फैसला लेती है, तो निकाय–पंचायतीराज चुनावों का पूरा परिदृश्य बदल सकता है।

Rj22 news

Written by Rj22 news

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